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कल की तारीख किसके हाथ में है?
धरावन, २०४२। घरेलू श्वसन-यंत्रों की मरम्मत करने वाली अन्विता को अपनी जीवित माँ के नाम अगले दिन की मृत्यु की सूचना मिलती है। पहली गलती कागज में दिखती है। दूसरी उस मशीन तक पहुँचती है जो माँ की रातों को सहारा देती है।
जब मदद की लागत ही किसी का भविष्य लिखने लगे, तो एक बेटी क्या बचाएगी - अपनी माँ की अगली साँस, अपना नाम, या उन घरों का भरोसा जिनका इलाज इसी नेटवर्क पर चलता है?
गलत अनुमानों, छिपे हिसाब और छोटे मानवीय साहस के बीच बुना एक स्वतंत्र विज्ञान-कथा थ्रिलर। यहाँ सबसे कठिन काम मशीन बंद करना नहीं, उसे सही वजह से चलते रहने देना है।
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