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दरभंगा राज की कहानी सरकारी गज़ेटियर, अदालती फ़ैसलों और दस्तावेज़ों में दर्ज है। «मिथिला का आख़िरी महाराजा» उसे स्रोतों के साथ शुरू से आज तक बताती है। यह «अनसुने सिंहासन» श्रृंखला की दूसरी पुस्तक है।
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