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बर्फ़, तूफ़ान और बदलते पहाड़ी रास्तों के बीच चार यात्री एक आख़िरी आश्रय की ओर बढ़ते हैं। तन्वी, दीपक, सलमा और चाचा के लिए यह केवल बच निकलने की यात्रा नहीं है। अधूरे वादे, पुराने डर और एक-दूसरे पर भरोसा उन्हें हर अगला क़दम उठाने की वजह देते हैं। पहाड़ के सन्नाटे में ज़िंदा लौटने की इच्छा सबसे गहरी आवाज़ बन जाती है।
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