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दूसरा द्वार खुला तो सारंग के सामने ज़मीन से बँधा एक शहर था, और उसके ऊपर उल्टा आसमान। इस लोक की बस्ती लंगरों के सहारे टिकी है। हर पलटाव में रस्सियाँ तन जाती हैं, और जो बँधा न रहे, वह ऊपर के आसमान में गिर जाता है।
लंगर जिनके क़ब्ज़े में हैं, वे बस्ती के लोगों को अपना ग़ुलाम बनाए रखना चाहते हैं। इनाया और उसके साथी बस्ती को बचाना चाहते हैं, पर बचाने का मतलब लोगों को एक मालिक से दूसरे मालिक के हवाले करना नहीं है।
जब बस्ती का बोझ बँटना हो, तो उसे थामने का हक़ किसका है? और जब पलटाव आए, तब कौन किसे बाँधे रखेगा?
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