You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
छह बार हारा, सातवीं बार इतिहास लिख दिया। मिथिलेश प्रसाद — बिहार के एक छोटे-से गाँव का गरीब लड़का। न पैसा, न पहुँच; बस माँ के गिरवी रखे चाँदी के कंगन का एक वादा, और पढ़ने की ऐसी भूख जो रात की मद्धम बत्ती में भी नहीं बुझती। पटना की एक छोटी-सी फोटोकॉपी दुकान — जहाँ ओलिविया उसके नोट्स की प्रतियाँ बनाती है, और धीरे-धीरे उसके सपनों की भी। बीपीएससी की परीक्षा — छह बार असफलता, छह बार टूटा आत्मविश्वास; और फिर सातवीं बार, वह नतीजा जो गाँव की मिट्टी से उठे लड़के को अफसर बना देता है। माँ का कंगन छूटता है, वादा पूरा होता है। और किस्मत का सबसे खूबसूरत मोड़ — एक दिन अफसर बनकर भी वह किसी कतार में सबसे आखिर में खड़ा मिलता है, मुस्कुराता हुआ। असफलताओं को जीत में बदलने की ऐसी कथा, जो कहती है — कतार का आखिरी आदमी भी पहुँचता है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book क़तार का आख़िरी आदमी.