You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
तेरा मेरा साथ "आठवाँ वचन" शृंखला का सातवाँ भाग है। साथ का मतलब अंत तक है; बीच का हिसाब नहीं।
2021, सोनकुंड। शुभांकर हॉस्टल चला गया है, मधुरिमा अपनी पढ़ाई में है, और सूर्यमुखी सदन अचानक बहुत बड़ा, बहुत ख़ाली लगने लगा है। ऋतविक और हेमांगी एक ही छत के नीचे रहते हैं, पर उनके बीच एक ठंडी दूरी आ बैठी है।
पचानबे बरस की कुंतला दादी अपनी आख़िरी ऋतु में हैं, और अपनी पीली डायरी में सातवाँ वचन लिख रही हैं। बरसों की गृहस्थी के बाद दो लोगों को फिर सीखना पड़ता है कि साथ किसे कहते हैं। जब बच्चे उड़ जाएँ और घर चुप हो जाए, तब दो लोगों के बीच क्या बचता है?
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book तेरा मेरा साथ.