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उमरात एक चलने वाला पहाड़ है, और उसके ऊपर रहने वाले लोग उसकी चाल के साथ जीवन बनाते आए हैं। एक साधारण सुबह तारिणी के पैरों के नीचे की ज़मीन बदल जाती है। माँ की चिंता, बेटे की बेचैनी और पहाड़ की नींद के बीच यह कथा बताती है कि घर छोड़ना और घर बचाना, दोनों फ़ैसले कितने भारी होते हैं।
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