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उस दिन दोपहर तक कुल तीन लोगों को मालूम था कि उसका जन्मदिन है। माँ, बहन, और स्टेट बैंक का एक एसएमएस। पटना के एक कमरे में अकेले बैठे उसने दसवीं के बच्चों के नोट्स के हाशिये पर पेंसिल से लिख दिया, "आज मेरा जन्म दिन है।" किसी से नहीं, किसी के लिए नहीं। फिर उसने वह पन्ना मिटाया नहीं। यह किताब उसी एक पंक्ति के बाद की है: फ़ोटोस्टेट की दुकान पर खड़ी एक लड़की, और गोलघर की चढ़ाई।
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