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रेवती पाल को एक प्रतियोगिता की सुबह मैट पर उतरने से पहले ही रुकना पड़ता है। नया वज़न वर्ग चुनने के बाद उसे अपने खेल, अपने शरीर और अपने रिश्तों को फिर से समझना पड़ता है। घर का हिसाब, साथी का अलग अवसर और अभ्यास के छोटे दिनों के बीच, उसका सफ़र सिर्फ़ आख़िरी अंक तक पहुँचने का नहीं है।
जीत की इच्छा और अपने शरीर की आवाज़ के बीच, क्या यह युवा पहलवान अपने लिए सही जगह बना पाएगी?
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