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यात्रा के इक्कीसवें साल पृथ्वी से आने वाले संदेश अचानक बंद हो जाते हैं। संचार-कक्ष की स्क्रीन पर अब सिर्फ़ एक सपाट रेखा बची है।
चौदह साल की इरावती मैत्र वहाँ पर्यवेक्षित प्रशिक्षु है, और वरिष्ठ अधिकारी हर समय उसके साथ रहते हैं। संदेश की देरी करीब नौ-दस महीने है, इसलिए पक्का पता नहीं चलता कि पृथ्वी चुप है, या यह सिर्फ़ एक पुराने प्रसारण-दौर की ख़ामोशी है।
परिषदें बँटती हैं, जनमत डगमगाता है, और सारथी ईमानदारी से कहता है कि वह नहीं जानता। क्या नौका इस मौन के साथ जीना सीख पाएगी?
मौन-वर्ष वसुधा-नौका की तीसरी पुस्तक है: संचार-कक्ष की पर्यवेक्षित प्रशिक्षु इरावती, पृथ्वी की अचानक थमी आवाज़ और सारथी की ईमानदार ना-जानने की विज्ञान-कथा।
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