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अयोध्या के नील ने पुराने अभिलेख सुरक्षित पहुँचाने का वचन दिया है, पर उसी समय माँ की आँखों की जाँच भी जरूरी है। शहर के बदलते रास्तों और दो अलग मुहरों के बीच उसे समझना पड़ता है कि वचन निभाना और सही काम करना हमेशा एक बात नहीं होते। मर्यादा का धनुष उन सीमाओं की कथा है जो मनुष्य खुद चुनता है, ताकि उसकी शक्ति किसी और की चोट न बने।
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