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सात अजनबी आखिरी बस में चढ़ते हैं। कोई बेटी से मिलने जा रहा है, कोई अपने घर से एक पुराना रेडियो लेने, कोई ऐसी खबर के बाद लौट रहा है जिसके लिए वह कभी तैयार नहीं था। सबके पास टिकट है। किसी के पास अपने अधूरे सवालों का जवाब नहीं।
बारिश की एक रात रास्ता धँस जाता है। बस रुकती है, लेकिन उनके भीतर बहुत कुछ पहली बार चलने लगता है। एक छोटे स्कूल की पीली रोशनी में उन्हें अपने शरीर की सीमाएँ, दूसरे की जरूरत और घर तक पहुँचने का असली अर्थ दिखाई देता है।
रात की आखिरी बस चोट के बाद धीरे लौटते जीवन की कहानी है। यहाँ सुबह किसी को नया आदमी बनाकर नहीं देती। वह बस कुछ नाम, कुछ कठिन सच और लौटने की खबर देने की एक वजह छोड़ जाती है।
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