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रसोई की आग "आठवाँ वचन" शृंखला का पहला भाग है। विदाई के बाद एक नए घर में हेमांगी की पहली परीक्षा रसोई से शुरू होती है, जहाँ उसका सामना ऋतविक, दादी कुंतला देवी और सूर्यमुखी की डायरी से होता है।
अठारह अध्यायों में यह कहानी एक परिवार, रिश्तों की परख और रसोई की आग के सहारे बनते-बिगड़ते भरोसे की है।
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