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पानी के नीचे एक और समय है।
अगस्त 2031। हानले में स्मृति-दर्पण का दूसरा क़दम अनाया को एक ऐसे नगर तक ले जाता है, जहाँ पत्थर की सीढ़ियाँ अँधेरे पानी में उतरती हैं और हर आवाज़ के पीछे किसी आने वाले विछोह की आहट है।
1565 के विजयनगर में वह मंदिर की नर्तकी माधवी के जीवन में पहुँचती है। यूसुफ़, एक फ़ारसी खगोलविद, आकाश के हिसाब में उत्तर ढूँढता है। माधवी अपने घर, अपने नृत्य और उन लोगों को सँभालना चाहती है जिन्हें किसी बड़े इतिहास में जगह नहीं मिलेगी। उनके बीच पनपता प्रेम नगर पर छाते संकट से अलग नहीं रह सकता।
अनाया जानती है कि मृत्यु बदली नहीं जा सकती। मगर याद को बचाने और जीवन को बदलने के बीच की रेखा कहाँ है? बावड़ी की गहराई में उसे एक ऐसी दरार दिखती है, जिसे समय ने अपने आप नहीं बनाया।
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