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आनंदु नायर पशु-चिकित्सा का छात्र है और एक वन-रक्षक का बेटा। हाथी से मुठभेड़ में उसके पिता का पैर गया, और उसके बाद घर में जंगल की बात करना बंद हो गया। 21 नवंबर की सुबह वायनाड के हाथी बिना किसी वजह के आँगन तक आ पहुँचते हैं। आनंदु को जानवरों का दर्द अपने शरीर में महसूस होने लगता है। जितना गहरा दर्द, उतनी भारी क़ीमत। चाय के बाग़ानों की पगडंडियों पर कोई उनका पीछा कर रहा है, एक शिकारी जो जंगल को हथियार बनाना चाहता है। आनंदु को तय करना है कि सुनना कमज़ोरी है या ताक़त।
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