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कप्तान मीरा सोलंकी के पुराने जहाज़ पर हर चीज़ का हिसाब है। ईंधन, मजदूरी और पिता के समय का बचा ऋण। एक बूढ़े मछुआरे की काली गोल वस्तु उसे वारुणीपुर की ओर ले जाती है, जहाँ समुद्रतल पर गलियाँ हैं और अँधेरे में कोई लंबी साँस लौटती है।
मीरा का दल उस आवाज़ को सुनता है। प्रतिद्वंद्वी कंपनी का रोहन वहाँ कुछ और सुनता है: निजी लाभ का अवसर। फिर मौसम पलटता है। एक बंद द्वार टूटता है और पुराने बंदरगाह का तीसरा स्वर कट जाता है।
भीतर जो बचा है, उसे उठाकर बेचना संभव नहीं। उसे सही जगह छोड़ने के लिए मीरा को अपने कर्ज़, अपने डर और घर में इंतजार करती बहन का सामना करना होगा।
वरुण की डूबती नगरी समुद्र के नीचे छिपे एक शहर और ऊपर लौटने की कीमत की कहानी है।
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