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आवाज़ चली गई। पर सुनना बाक़ी है। तारापीठ गाथा की आठवीं पुस्तक में ईरा लौट नहीं सकती। तारापीठ उसका घर है, दोस्त बिखर चुके हैं, और जिस सातवें खंड को उसने खोला, वह अब सबसे ख़तरनाक रास्ता है। दोस्ती, ज़िम्मेदारी और अधूरी भारत-यात्रा के बीच ईरा की छिपी दुनिया की कहानी।
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