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सात दिन बाद अन्वी माधवपुर छोड़ देगी। नई नौकरी, नया कमरा और एक ऐसी जिंदगी उसका इंतजार कर रही है जिसे अब उसे अपने लिए बनाना है। तभी राघव मिलता है: अपने काम, अपनी माँ और अपने बीते हुए विवाह के बीच ठहरा हुआ एक आदमी। सात दिनों में दोनों एक-दूसरे के सामने सच बोलना सीखते हैं। मगर प्रेम शुरू हो जाने से विदाई रुक नहीं जाती।
शहर छोड़ने वाली लड़की उस मोहब्बत की कहानी है जो किसी को रोककर नहीं, उसे उसके रास्ते पर जाने देकर अपनी सच्चाई बचाती है।
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