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एक नगर है जहाँ मशीनें रात को सपने देखती हैं। सुबह वही सपने हुक्म बन जाते हैं, और उन्हें पढ़ने से कोई इनकार नहीं कर सकता।
सारंग, इनाया, अर्यमन और श्रुति चक्कियों, पानी-घरों और घड़ी-घरों के बीच से गुजरते हैं। हर जगह कोई मशीन अटकती है, और हर बार उसे सुनने के लिए किसी को रुकना पड़ता है।
आगे का रास्ता एक रात माँगता है। सारंग को तय करना है कि वह उसे कैसे देगा, और बाकी तीन उसके बगल में जागकर क्या देखेंगे।
शतद्वार की पैंतीसवीं किताब सुनने, सँभालने और ठहरने की कथा है।
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