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धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे,

सुशील शर्मा
Type: Print Book
Genre: Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹302 + shipping
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Description

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे
(पुस्तक परिचय)

"धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे" केवल महाभारत के युद्ध का पुनर्कथन नहीं है, बल्कि धर्म, कर्तव्य, न्याय, सत्ता, नैतिकता और मानवीय अंतर्द्वंद्व का गंभीर विवेचन है। यह कृति पाठक को युद्धभूमि की घटनाओं से आगे ले जाकर उस मानसिक, सामाजिक और दार्शनिक संघर्ष से परिचित कराती है, जिसने महाभारत को युगों-युगों तक प्रासंगिक बनाए रखा है।

लेखक ने महाभारत के पात्रों को केवल पौराणिक चरित्रों के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय गुण-दोषों से युक्त व्यक्तित्वों के रूप में देखा है। भीष्म का व्रत, द्रोण की दुविधा, कर्ण की निष्ठा, विदुर की नीति, कृष्ण का लोककल्याणकारी दृष्टिकोण तथा अर्जुन का विषाद—इन सबके माध्यम से यह कृति आधुनिक जीवन के प्रश्नों का भी उत्तर खोजती है।

पुस्तक का मूल संदेश यह है कि प्रत्येक युग में मनुष्य का जीवन स्वयं एक कुरुक्षेत्र है, और जब वह सत्य, न्याय एवं कर्तव्य का मार्ग चुनता है, तभी उसका जीवन धर्मक्षेत्र बनता है।

सरल किन्तु प्रभावशाली भाषा, तार्किक विश्लेषण और भारतीय सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत यह कृति महाभारत के अध्येताओं, शोधार्थियों तथा सामान्य पाठकों सभी के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होती है। यह केवल इतिहास या धर्मग्रंथ की व्याख्या नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के लिए जीवन-मूल्यों का एक सार्थक दस्तावेज है

About the Author

लेखक परिचय

सुशील शर्मा हिंदी साहित्य के बहुविध प्रतिभा-संपन्न रचनाकार हैं। कविता, गीत, नवगीत, दोहा, कुंडलिया, लघुकथा, व्यंग्य, नाटक, एकांकी, समीक्षा तथा वैचारिक आलेख जैसी अनेक विधाओं में उनका सृजन निरंतर सक्रिय है। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, राष्ट्रीय चेतना, शिक्षा, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों को उन्होंने अपनी रचनाओं का प्रमुख आधार बनाया है।

दीर्घकाल तक शिक्षा विभाग में सेवाएँ देने के उपरांत आपने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गाडरवारा (जिला नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश) के प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में आपका योगदान समान रूप से उल्लेखनीय रहा है। शिक्षण और प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ आपने साहित्य-साधना को निरंतर जारी रखा।
आपकी अभी तक उनतीस पुस्तकें प्रकाशित हैं कुछ प्रमुख कृतियों में मानस के राम, वैदेही की आत्म यात्रा , धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे, शिव संकल्पमस्तु, पलकों पर ठहरा आकाश, अकेलेपन से उजालों तक, टाटपट्टी के डिजिटल सपने तथा धूप छाँव के सौ रंग,गोविन्द गीत ,आधुनिक बुद्ध ओशो जैसी विविध विधाओं की पुस्तकें सम्मिलित हैं। आपकी रचनाओं में भारतीय जीवन-दर्शन, नैतिक चेतना, लोकसंवेदना तथा समकालीन यथार्थ का संतुलित समन्वय दिखाई देता है।
आपकी अनेक रचनाएँ प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा विभिन्न साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं। आपकी लेखनी परंपरा और आधुनिकता के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है। सरल, प्रवाहपूर्ण और साहित्यिक भाषा आपकी अभिव्यक्ति की विशेष पहचान है।
वर्तमान में आप पूर्णकालिक साहित्य-साधना में संलग्न हैं तथा हिंदी साहित्य की विविध विधाओं में सतत सृजनरत हैं। आपका उद्देश्य साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना, मानवीय मूल्यों और सकारात्मक सामाजिक दृष्टि का प्रसार करना है।
सुशील शर्मा का विश्वास है कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय उत्थान का प्रभावी साधन भी है। यही विश्वास उनकी समस्त रचनाधर्मिता की मूल प्रेरणा है।

Book Details

ISBN: 9789361234682
Publisher: Sushil Sharma
Number of Pages: 94
Dimensions: 8"x11"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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