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'उन्होंने आपकी कलाई पर एक धागा बाँधा और उसे रक्षा का नाम दिया। यह किताब उस धागे को काटने वाली कैंची है।'
मनुस्मृति ने आपको बताया कि आपकी जाति ईश्वरीय विधान है। महाकाव्यों ने बताया कि आज्ञापालन ही सबसे बड़ा गुण है। पुजारियों ने बताया कि सवाल पूछना पाप है। तीन हज़ार सालों तक, पुरुषों के एक छोटे से वर्ग ने नियम बनाए, दावा किया कि उन्हें देवताओं ने लिखा है, और जिसने भी 'क्यों' पूछा, उसे सज़ा दी।
पवित्र झूठ (Sacred Lies) उन ग्रंथों को चीर कर रख देती है, जिन पर आपको कभी सवाल न उठाने को कहा गया था। मनुस्मृति के 'गुलामी के संविधान' से लेकर राम द्वारा बालि के वध तक, एकलव्य के कटे हुए अंगूठे से लेकर द्रौपदी की अनसुनी चीख तक — यह किताब हर पवित्र कहानी को आईना दिखाती है और पूछती है: असल में फायदा किसे हो रहा है?
यह आस्था पर हमला नहीं है। यह सत्ता का पोस्टमार्टम है। श्लोक पढ़ें। स्रोत जांचें। और फिर खुद तय करें कि आपकी कलाई पर बंधा धागा रक्षा है — या एक पट्टा।
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