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कुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं…
वे धीरे-धीरे भीतर जमा होती हैं।
कभी किसी अधूरी बातचीत में, कभी किसी खामोश रात में, और कभी खिड़की पर गिरती बारिश की बूंदों में। “वो बारिश जो मेरी खिड़की तक आती है” ऐसी ही एक कहानी है। यह केवल प्रेम की कहानी नहीं है, और न ही सिर्फ एक रहस्य या अपराध कथा। यह उन भावनाओं की कहानी है, जिन्हें लोग अक्सर अपने भीतर दबाकर जीते रहते हैं। यह भरोसे और शक के बीच की दूरी है। यह रिश्तों की गर्माहट भी है और उनके भीतर छिपी ठंडी खामोशी भी।
इस कहानी की शुरुआत एक suicide note से होती है, लेकिन इसका सफर केवल मृत्यु तक सीमित नहीं रहता। जैसे-जैसे पन्ने आगे बढ़ते हैं, एक लड़की की डायरी, उसकी यादें, उसके रिश्ते, उसके डर, उसकी उम्मीदें और उसके भीतर छुपे कई अनकहे सच धीरे-धीरे सामने आने लगते हैं।
बारिश इस पुस्तक में सिर्फ मौसम नहीं है।
कहीं वह सुकून है, कहीं बेचैनी।
कहीं प्रेम है, तो कहीं एक डरावनी खामोशी।
और शायद इसी वजह से यह कहानी हर उस इंसान से जुड़ती है, जिसने कभी किसी को खोने का डर महसूस किया हो, या किसी को बेहद चुपचाप प्यार किया हो।
इस पुस्तक के पात्र पूर्ण नहीं हैं।
वे गलतियाँ करते हैं, उलझते हैं, टूटते हैं, छुपाते हैं, और कई बार खुद से भी सच नहीं बोल पाते। लेकिन शायद यही उन्हें वास्तविक बनाता है।
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