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The Musafir of Tarara Part l

The true story of a stubborn traveler's struggle, the CDS exam, and a father's dreams.
AKASH POSWAL
Type: Print Book
Genre: Biographies & Memoirs, Travel
Language: Hindi
Price: ₹349 + shipping
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Description

"सफलता सिर्फ़ उस रोल नंबर का नाम नहीं है जो पीडीएफ (PDF) में चमकता है। असली सफलता तो वो है, जब आप दुनिया की हर ठोकर खाने के बाद भी आज सुबह फिर से किताबें उठाकर पढ़ने बैठ गए हैं।"यह कहानी किसी ऐसे पारंपरिक हीरो की नहीं है जिसने एक ही बार में किला फ़तह कर लिया। यह दास्तां है एक जिद्दी मुसाफ़िर की, जिसकी मंज़िल हर बार बस एक कदम की दूरी पर खड़ी होकर उसे चिढ़ाती रही। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव 'ततारा' से शुरू हुआ यह सफ़र सिर्फ़ वर्दी (CDS Exam) को पाने की चाहत नहीं है, बल्कि एक बेटे की अपने पिता के सपनों को हकीकत में बदलने की अग्निपरीक्षा है।जब एक भयानक दुर्घटना में पिता का शरीर आग की लपटों से झुलस जाता है, तब रातों-रात एक अल्हड़ लड़के के कंधों पर ज़िम्मेदारी का भारी बोझ आ पड़ता है। दिल्ली के बड़े अस्पतालों के फुटपाथों और सीढ़ियों पर कटी रातें, दवाओं की तीखी गंध के बीच लक्ष्मीकांत और स्पेक्ट्रम जैसी भारी-भरकम किताबों का संघर्ष, और पिता के दर्द को कम करने की बेताब कोशिशें—यह किताब हर उस युवा के दिल को छू लेगी जो अपनी विपरीत परिस्थितियों से लड़ रहा है।"एक हाथ में मरहम था, एक हाथ में किताब थी,मेरी हर रात एक मुश्किल भरा ख्वाब थी।दुनिया जिसे संघर्ष कहती है, मैंने उसे इबादत मान लिया,पिता की सेवा में ही मैंने अपनी जीत का राज़ जान लिया।"यह कहानी गवाह है:अस्पताल के वार्ड से लेकर सेना के कपूरथला सिलेक्शन सेंटर (SSB) के ऐतिहासिक गेट तक के रोमांचक सफ़र की।हिंदी माध्यम का छात्र होने के समाज के तंज़ को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाने की।स्क्रीन आउट (Screen Out) होने के बाद टूटकर बिखरने और फिर से एक 'योद्धा' बनकर उठ खड़े होने के फौलादी जज़्बे की।यह एक ऐसे मुसाफ़िर की सच्ची और बेहद भावुक दास्तां है जो हारकर भी कभी थमा नहीं, क्योंकि उसका सफ़र अभी जारी है! अगर आप भी जीवन में असफलताओं से थक चुके हैं, तो यह किताब आपकी रूह को छू लेगी और आपको फिर से लड़ने का हौसला देगी।पाठकों के लिए संदेश:"दोस्तों, इस पन्ने को पढ़ते हुए आप हैरान होंगे कि कोई 19 घंटे बात करके कैसे पढ़ सकता है? पर यही इंसान के मन की शक्ति है। जब आपको कोई ऐसा मिल जाता है जो आपकी खामोशी को समझ ले, तो आपकी ऊर्जा दुगुनी हो जाती है। लेकिन यहाँ एक चेतावनी भी है—यह संतुलन बहुत नाजुक होता है। मैंने पढ़ाई और प्यार को एक साथ साधा, क्योंकि मेरे पास हारने का विकल्प नहीं था। अगर आप भी किसी ऐसे रिश्ते में हैं, तो उसे अपनी 'कमज़ोरी' नहीं, अपनी 'ताकत' बनाइये। याद रखिये, जो आपको आपकी मंज़िल से दूर ले जाए, वह प्यार नहीं 'ज़हर' है। और जो आपको पढ़ने के लिए प्रेरित करे, वही असली हमसफ़र है।"

About the Author

आकाश पोसवाल* तरारा का एक साधारण मुसाफ़िर है, जिसकी कहानी आग से शुरू होती है और हौसले पर खत्म।

तरारा के जलते फर्श से उठकर उसने *एस.एस.बी. देहरादून* के बेरहम दरवाज़ों तक का सफर तय किया। रिजेक्शन और तानों के बीच, उसने अपने पिता के दर्द को अपना मकसद बना लिया।

आकाश एक लेखक और सपने देखने वाला है, जो एक्शन और आत्म-मंथन के बीच का फासला अपनी कलम से भरता है। आज भी वह पहाड़ों के बीच रहकर लिखता है, और उन लाखों नौजवानों को हिम्मत देता है जो अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं।

*"तरारा का मुसाफ़िर"* उसकी पहली किताब है - एक वादा, एक इंकलाब।

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Book Details

Number of Pages: 181
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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