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एक सर्द दोपहर घर में घटी एक अप्रत्याशित घटना ने दीप्ति शर्मा के जीवन की दिशा बदल दी। जो एक साधारण दुर्घटना प्रतीत होती थी, वह धीरे-धीरे विश्वास, मित्रता, साहस और कृपा की गहराई को समझने वाली एक असाधारण यात्रा में बदल गई।
इस पुस्तक में लेखिका अपने जीवन के उन दिनों को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ साझा करती हैं, जब दर्द, अनिश्चितता और मृत्यु के निकट पहुँच जाने के अनुभव ने उन्हें जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित किया। कठिन परिस्थितियों के बीच मित्रों का निस्वार्थ साथ, चिकित्सा कर्मियों की करुणा और एक अदृश्य दिव्य उपस्थिति का अनुभव इस संस्मरण को केवल एक व्यक्तिगत कहानी नहीं रहने देता, बल्कि इसे आशा, विश्वास और आंतरिक शक्ति की प्रेरक यात्रा बना देता है।
यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए है जो जीवन की चुनौतियों के बीच आशा की किरण खोज रहे हैं, और जो यह जानना चाहते हैं कि कभी-कभी जीवन के सबसे कठिन क्षणों में ही कृपा का सबसे गहरा स्पर्श अनुभव होता है।
साँस और मौन के बीच - कृपा का स्पर्श एक सच्ची कहानी है आस्था, मित्रता, साहस और उस अदृश्य कृपा की, जो हमें तब भी संभाले रहती है जब हमें लगता है कि हम अकेले हैं।
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