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हरयाणवी: बोली से भाषा तक का भाषाई सामर्थ्य

Anand Kumar Ashodhiya
Type: Print Book
Genre: Social Science
Language: Hindi
Price: ₹301 + shipping
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Description

“हरयाणवी: बोली से भाषा तक का भाषाई सामर्थ्य” हरयाणवी भाषा की भाषिक संरचना, मानकीकरण, सामाजिक स्वीकृति तथा सांस्कृतिक पहचान पर आधारित एक गंभीर भाषावैज्ञानिक एवं समाजभाषावैज्ञानिक शोध-कृति है। यह पुस्तक हरयाणवी को केवल एक क्षेत्रीय बोली के रूप में नहीं, बल्कि समृद्ध व्याकरणिक संरचना, सशक्त लोकसाहित्य, व्यापक सामाजिक व्यवहार और स्वतंत्र भाषिक अस्मिता से युक्त भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती है।
इस शोध में हरयाणवी के ऐतिहासिक विकास, ध्वन्यात्मक संरचना, शब्द-संपदा, उपबोलियों, लोक-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों तथा आधुनिक जनसंचार माध्यमों में उसकी उपस्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक भाषा और बोली के पारंपरिक विभाजन पर पुनर्विचार करते हुए यह प्रतिपादित करती है कि किसी भी भाषा की पहचान उसके सामाजिक प्रयोग, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक स्वीकार्यता से निर्मित होती है।
यह कृति भाषाविज्ञान, लोकसाहित्य, समाजशास्त्र, सांस्कृतिक अध्ययन तथा क्षेत्रीय भाषा-अध्ययन से जुड़े शोधार्थियों, विद्यार्थियों और अध्येताओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ-स्रोत सिद्ध होती है। साथ ही, भारतीय लोकभाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक विमर्श में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी और विचारोत्तेजक है।

About the Author

आनन्द कुमार आशोधिया
(हरयाणवी साहित्य में: कवि आनन्द शाहपुर)
आनन्द कुमार आशोधिया समकालीन भारतीय साहित्य, लोक-संस्कृति अध्ययन और अनुवाद साहित्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारतीय वायु सेना में वॉरंट ऑफिसर के रूप में 32 वर्षों की गौरवशाली सेवा पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने स्वयं को साहित्य, लोक-संस्कृति संरक्षण और शोधपरक लेखन के लिए समर्पित किया। अन्नामलाई विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर (M.A.) आशोधिया जी का साहित्यिक कार्य लोक-परंपरा और शास्त्रीय अनुशासन के समन्वय का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
उन्होंने 380 से अधिक मौलिक रचनाओं तथा अनेक शोधपरक ग्रंथों के माध्यम से हरयाणवी लोक-साहित्य, विशेषतः रागणी, सांग-परंपरा और पिंगल (छंदशास्त्र) को अकादमिक विमर्श में गंभीरता से स्थापित करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। उनका लेखन लोक-स्मृति, सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक चेतना और भाषाई स्वाभिमान के प्रश्नों को केंद्र में रखता है।
हरियाणा के ऐतिहासिक ग्राम शाहपुर तुर्क (जनपद सोनीपत) में जन्मे तथा वर्तमान में मुंबई को कर्मभूमि बनाने वाले आशोधिया जी भारतीय लोक-साहित्य को वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जोड़ने के लिए भी निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने SĀKET जैसी कालजयी कृतियों का अंग्रेज़ी Trans-creation कर भारतीय साहित्य की अंतरराष्ट्रीय पहुँच को सुदृढ़ किया है।
उनकी प्रमुख कृतियों में अधराजण, थारा मुद्दा थारी बात, हीर राँझा, द्रौपदी: एक लोक चेतना, अविकावनी हरयाणवी रागणी संग्रह, प्रेम के सौ रंग तथा Antaryātrā उल्लेखनीय हैं। साहित्य एवं लोक-संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान हेतु उन्हें हरयाणवी साहित्य रत्न, हरियाणा संस्कृति गौरव रत्न तथा कारगिल गौरव विजय सम्मान सहित अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।

Book Details

ISBN: 9789359120621
Publisher: Anand Kumar Ashodhiya
Number of Pages: 134
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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