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देवकाली – तहसील के गलियारों से एक दास्तान
एक साधारण आदमी की अपनी ही जमीन को बचाने की लड़ाई आखिर कितनी लंबी और कठिन हो सकती है?
देवकाली उत्तर प्रदेश की तहसीलों, राजस्व अभिलेखों, मुकदमों और प्रशासनिक तंत्र की उस दुनिया में ले जाती है, जहाँ सच अक्सर फाइलों के बोझ तले दब जाता है और न्याय वर्षों तक प्रतीक्षा करवाता है।
वरण शुक्ला की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो अपनी ही भूमि, अधिकार और सम्मान के लिए सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।
तहसील के गलियारों, राजस्व अभिलेखों, लेखपालों, अधिकारियों, पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच आगे बढ़ती यह कथा व्यवस्था की जटिलताओं, मानवीय संघर्षों और न्याय की तलाश को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।
देवकाली केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का दस्तावेज़ है जहाँ एक आम नागरिक की सबसे बड़ी लड़ाई कभी-कभी अपने ही अधिकार को साबित करने की होती है
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