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एक उत्तर कम पड़ गया

मेधा से प्रज्ञा तक की यात्रा
ASOKA
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹320 + shipping
This book ships within India only.
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Description

नानी के अंतिम संस्कार के तीसरे दिन, बेंगलुरु की AI engineer मेधा को उनकी पुरानी कठोपनिषद् में एक बिजली का बिल मिलता है। उस पर नानी की लिखावट में एक पंक्ति है—वेदिका से पूछना है।

उसी सप्ताह उसकी कंपनी का AI system, "मंथन", एक स्त्री को नौकरी की दौड़ से बाहर कर देता है—क्योंकि उसने अठारह महीने अपनी माँ की सेवा की थी।

एक प्रश्न से शुरू होकर मेधा की यात्रा काशी के घाटों, हिमालय के एक गाँव, और शृंगेरी, मेलकोटे और उडुपी तक जाती है—नचिकेता, गार्गी, मैत्रेयी और उपनिषदों के ऋषियों के साथ; कर्म, पुनर्जन्म, माया और मोक्ष के प्रश्नों के बीच; और एक ऐसे पारिवारिक रहस्य की ओर, जिसे तीस साल तक एक पुरानी अलमारी में छिपाकर रखा गया था।

यह उपन्यास भारतीय दर्शन की अनेक परम्पराओं को उनकी पूरी गरिमा के साथ सामने रखता है—और किसी एक को अंतिम उत्तर नहीं कहता। क्योंकि कभी-कभी जीवन ऐसा प्रश्न पूछता है, जिसके सामने एक उत्तर कम पड़ जाता है।

मेधा से प्रज्ञा तक की एक यात्रा—जानने से देखने तक।

About the Author

ASOKA पेशे से केमिकल इंजीनियर हैं। लगभग पच्चीस वर्षों तक उन्होंने तेल, गैस, रिफ़ाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स की दुनिया में काम किया है—भारत, यूनाइटेड किंगडम और मध्य-पूर्व सहित कई देशों में रहते और काम करते हुए। तकनीकी भूमिकाओं से शुरू हुई उनकी यात्रा आगे चलकर निवेश-विश्लेषण, रणनीति और टेक्नोलॉजी तक फैली।

इसी यात्रा में AI, data और "बुद्धि" के बदलते अर्थ से उनका जुड़ाव गहरा होता गया। और मशीनों की इस नई बुद्धि को समझने की कोशिश उन्हें, अप्रत्याशित रूप से, बहुत पुराने भारतीय प्रश्नों तक वापस ले आई—ज्ञान क्या है? चेतना क्या है? "मैं" कौन हूँ? और जीवन का अर्थ क्या है?

वे संस्कृत के विद्वान नहीं हैं, न किसी धार्मिक परम्परा के आचार्य। वे एक इंजीनियर हैं, और जीवन भर प्रश्न पूछते रहे हैं—सनातन परम्परा के एक साधारण अनुयायी, जो अपनी ही परम्परा के रीति-रिवाजों के पीछे छिपे अर्थ को समझना चाहते थे।

एक उत्तर कम पड़ गया उनकी पहली पुस्तक है। उनका विश्वास है कि अपनी परम्परा से प्रेम करना और उससे प्रश्न पूछना एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं; और मशीनों के साथ बड़ी होती नई पीढ़ी को अपनी जड़ों तक पहुँचने के लिए किसी उपदेश की नहीं, एक खुली बातचीत की ज़रूरत है।

Book Details

Number of Pages: 288
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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