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यह किताब किसी कहानी की तरह शुरू होती है,
लेकिन धीरे-धीरे यह आपकी अपनी कहानी बन जाती है।
एक सुबह की बेचैनी,
घाटों के बीच चलती एक चुप यात्रा,
जलती चिताओं के सामने खड़ा मन,
और एक कप काली कॉफी के साथ बैठा हुआ एक अकेला इंसान—
इन साधारण-से दिखने वाले क्षणों में छिपा है
जीवन का वह हिस्सा, जिसे हम अक्सर देखते हुए भी नहीं देख पाते।
यह पुस्तक आपको कोई उपदेश नहीं देती,
कोई समाधान नहीं थोपती—
यह बस आपको आपके ही भीतर ले जाकर खड़ा कर देती है।
जहाँ आप पाएँगे कि
जीवन बदलने के लिए बहुत कुछ बदलना नहीं पड़ता,
कभी-कभी बस देखना शुरू करना पड़ता है।
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