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दिवाली आने वाली हो और घर में सफाई का ऐलान न हो, ऐसा कैसे हो सकता है?
दिवाली से कुछ दिन पहले ही घर का माहौल बदलने लगता है। मम्मी की नजर सबसे पहले उन कोनों पर जाती है, जहाँ महीनों से किसी ने झाड़ू तक नहीं लगाई। पापा पुराने सामान को फेंकने से पहले उसकी पूरी कहानी सुनाने बैठ जाते हैं। बच्चे सफाई के नाम पर कभी पानी पीने चले जाते हैं, तो कभी अचानक उन्हें अपना जरूरी होमवर्क याद आ जाता है!
और फिर शुरू होती है घर की सबसे बड़ी मुहिम—दिवाली की सफाई!
पुराने डिब्बे खुलते हैं, अलमारी से सालों पुराने कपड़े निकलते हैं, बिस्तर के नीचे खोई हुई चीजें मिलती हैं और किसी कोने में ऐसा सामान दिखाई दे जाता है, जिसके बारे में पूरा परिवार भूल चुका था। सफाई करते-करते पुराने फोटो, बचपन के खिलौने और यादों से भरी छोटी-छोटी चीजें निकल आती हैं। जिन्हें हटाने के लिए निकले थे, उन्हीं को देखकर लोग बैठ जाते हैं और आधा घंटा पुरानी बातें करने में निकल जाता है।
इस बीच किसी को पंखा साफ करना है, किसी को परदे उतारने हैं, किसी को बाजार से सजावट का सामान लाना है और किसी को बार-बार यह समझाना है कि घर में रखी हर पुरानी चीज कबाड़ नहीं होती!
दिवाली की सफाई, परिवार की कसरत परिवार के इसी मजेदार अनुभव को हल्के-फुल्के अंदाज में सामने लाने वाली किताब है। इसमें घर की सफाई के दौरान होने वाली नोकझोंक, जिम्मेदारियों का बँटवारा, पुराने सामान से जुड़ी यादें और त्योहार की तैयारियों का उत्साह शामिल है।
यह किताब सिर्फ धूल साफ करने की कहानी नहीं है, बल्कि उन पलों की कहानी भी है जब परिवार साथ काम करता है, एक-दूसरे की टाँग खींचता है, छोटी बातों पर हँसता है और मिलकर घर को नए त्योहार के लिए तैयार करता है।
कभी-कभी सफाई के दौरान हमें पता चलता है कि घर में जगह की कमी से ज्यादा सामान जमा हो गया है। कभी महसूस होता है कि जिन चीजों को हम बेकार समझ रहे थे, उनसे हमारी कोई प्यारी याद जुड़ी हुई है। और कभी यह समझ आता है कि घर को खूबसूरत बनाने में केवल सजावट नहीं, बल्कि परिवार का साथ भी जरूरी है।
अगर आपके घर में भी दिवाली की सफाई के नाम पर पूरा परिवार सक्रिय हो जाता है, कोई काम से बचने की कोशिश करता है और कोई सबको निर्देश देता फिरता है, तो इस किताब के कई दृश्य आपको अपने घर जैसे लग सकते हैं।
यह किताब उन सभी पाठकों के लिए है जो परिवार के साथ त्योहार मनाना पसंद करते हैं, पुरानी यादों में खो जाते हैं और छोटी-छोटी घटनाओं में हँसी ढूँढ़ लेते हैं।
तो झाड़ू उठाइए, पुराने डिब्बे खोलिए और तैयार हो जाइए—क्योंकि दिवाली की सफाई में घर ही नहीं, पूरे परिवार की कसरत होने वाली है!
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