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“मेरे बाबा” एक पोते की स्मृतियों से लिखी गई एक भावनात्मक स्मृति-पुस्तक है। यह केवल चौधरी प्रभात राम नटवाड़िया जी के जीवन की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार, संस्कार, निस्वार्थ प्रेम और उन छोटी-छोटी यादों का संग्रह है जो समय के साथ और भी अनमोल हो जाती हैं।
इस पुस्तक में एक ऐसे बाबा की छवि संजोई गई है, जिन्होंने अपने हाथों की मेहनत से घर बसाया, परिवार को जोड़ा, अगली पीढ़ियों को शिक्षा और संस्कारों का महत्व सिखाया और अपने जाने के बाद भी यादों में जीवित रहे।
यह पुस्तक उनके जीवन, उनके स्नेह और उनकी अमर सीख को परिवार की आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है।
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