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बृहदारण्यक उपनिषद् (eBook)

आत्मा और ब्रह्म की खोज
Type: e-book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹50
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

बृहदारण्यक उपनिषद्: एक शाश्वत ज्ञान की दृश्य यात्रा (हिन्दी संस्करण) भारतीय ज्ञान परंपरा के सबसे प्राचीन और गहन उपनिषदों में से एक का चित्रात्मक पुनर्प्रस्तुतीकरण है। यह पुस्तक याज्ञवल्क्य, गार्गी, मैत्रेयी और राजा जनक जैसे महान पात्रों के संवादों के माध्यम से आत्मा, सत्य, ज्ञान, अमरत्व और मुक्ति जैसे गूढ़ दार्शनिक विषयों को सरल, आकर्षक और सहज हिन्दी में प्रस्तुत करती है। प्रत्येक पृष्ठ सशक्त चित्रों और संक्षिप्त कथाओं के माध्यम से उपनिषद् की मूल भावना को जीवंत बनाता है, जिससे यह पुस्तक बच्चों, युवाओं और वयस्कों सभी के लिए समान रूप से उपयोगी बनती है। यह कृति प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान और आधुनिक युग की चुनौतियों के बीच एक सार्थक सेतु का कार्य करती है तथा यह दर्शाती है कि आत्म-अन्वेषण, नैतिकता और आंतरिक शांति की उपनिषद् की शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सहस्रों वर्ष पूर्व थीं।

About the Author

डॉ. पार्थ मजुमदार एक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, रणनीतिकार और लेखक हैं, जिन्हें वैश्विक निगमों, उद्यमशील उपक्रमों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान, व्यवसाय प्रशासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में उच्च स्तरीय शैक्षणिक योग्यताएँ अर्जित की हैं।

सीमेंस, मोबिली, जेपी मॉर्गन चेस जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाने के साथ-साथ मजुमदार कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी प्रणालियों के विकास का नेतृत्व किया है। उन्होंने एशिया, मध्य-पूर्व और यूरोप के विभिन्न देशों में सरकारों तथा दूरसंचार क्षेत्र की अग्रणी संस्थाओं को रणनीतिक परामर्श भी प्रदान किया है।

८५ से अधिक पुस्तकों और २५ से अधिक शोध-पत्रों के लेखक डॉ. मजुमदार उद्योग और अकादमिक जगत के अनुभवों का अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करते हैं। उनकी विशेषज्ञता डेटा विज्ञान, परियोजना प्रबंधन तथा नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रतिष्ठित है। उनका कार्य नवाचार, सांस्कृतिक प्रज्ञा और सतत विकास पर आधारित नेतृत्व की एक ऐसी दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है, जो आधुनिक प्रौद्योगिकी को मानवीय मूल्यों और ज्ञान परंपराओं के साथ जोड़ती है।

Book Details

Publisher: Dr Partha Majumdar
Number of Pages: 35
Availability: Available for Download (e-book)

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बृहदारण्यक उपनिषद्

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