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“मैंने मौन को बोलते सुना है” हिंदी कविता संग्रह (eBook)

(“शहर स्वतःला संपवायच्या आधी” इस मराठी कविता संग्रह का हिन्दी अनुवादित साहित्य कृती)
Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹10
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

“मैंने मौन को बोलते सुना है”
यह काव्य-संग्रह पारंपरिक अर्थों में सुकून देने वाली कविताओं का संकलन नहीं है, बल्कि यह पाठक को उसकी अपनी वास्तविकता से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम है। इसमें शामिल कविताएँ जीवन, अस्तित्व, और आधुनिक समाज की उस “सामान्यता” पर प्रश्न उठाती हैं, जिसे हम बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं।
यह पुस्तक उस शहर और समय की कहानी कहती है, जहाँ मनुष्य बाहर से जीवित दिखता है, लेकिन भीतर से धीरे-धीरे खाली होता जाता है। कविताएँ यह पूछती हैं कि क्या हम सच में जी रहे हैं या केवल एक तय ढर्रे पर चल रहे हैं।
इन रचनाओं में स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते, बल्कि गहरे और असहज प्रश्न मिलते हैं, जो पाठक को सोचने और आत्ममंथन करने के लिए विवश करते हैं। भाषा यहाँ केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि एक संघर्ष है—टूटी, अधूरी और कभी-कभी जानबूझकर अस्पष्ट।
यह संग्रह निराशा का नहीं, बल्कि ईमानदारी का दस्तावेज़ है, जो झूठी आशा के बजाय सच्चाई के अंधकार को स्वीकार करने का साहस देता है।

About the Author

परिमल कुमार
परिमल कुमार एक संवेदनशील और चिंतनशील कवि हैं, जिनकी रचनाएँ मनुष्य के आंतरिक द्वंद्व, अस्तित्व के प्रश्नों और आधुनिक जीवन की विडंबनाओं को गहराई से स्पर्श करती हैं। उनकी कविता में भावनाओं की सादगी के साथ विचारों की जटिलता भी दिखाई देती है। वे पारंपरिक सांत्वना देने वाली कविता के विपरीत, पाठक को असहज प्रश्नों से सामना कराते हैं और आत्ममंथन की ओर प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी में मौन, अंधकार और सत्य के बीच का संबंध प्रमुख रूप से उभरता है। कवि एक गंभीर विचारक और साहित्य-प्रेमी रचनाकार हैं, जो जीवन के यथार्थ और समाज की आंतरिक संरचनाओं को समझने का प्रयास करते हैं। उनकी दृष्टि सूक्ष्म और विश्लेषणात्मक है, जो साधारण दिखने वाली बातों में भी गहरे अर्थ खोजती है। इस काव्य-संग्रह में उनका योगदान विचारों की गहराई और दार्शनिक दृष्टिकोण को मजबूत बनाता है, जिससे रचनाएँ केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि बौद्धिक स्तर पर भी प्रभाव छोड़ती हैं।
संवेदना इस पुस्तक को एक ऐसा रूप देती है, जहाँ कविता केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि अनुभव करने और भीतर तक महसूस करने की प्रक्रिया बन जाती है।

Book Details

ISBN: 9789349789241
Publisher: pothi.com
Number of Pages: 61
Availability: Available for Download (e-book)

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“मैंने मौन को बोलते सुना है” हिंदी कविता संग्रह

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