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योग, प्राणायाम और भावनात्मक संतुलन: शरीर व मन की संपूर्ण चिकित्सा (eBook)

Type: e-book
Genre: Diet & Health
Language: Hindi
Price: ₹300
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

मनुष्य का जीवन केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं है; यह विचारों, भावनाओं और ऊर्जा के एक जटिल ताने-बाने से निर्मित है। आधुनिक जीवनशैली ने हमें सुविधाएँ तो दी हैं, परंतु इसके साथ ही तनाव, चिंता, मानसिक असंतुलन और शारीरिक रोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि हम अपने भीतर झाँकें और उस मूल स्रोत को समझें जहाँ से असंतुलन उत्पन्न होता है।
यह पुस्तक “योग, प्राणायाम और भावनात्मक संतुलन: शरीर व मन की संपूर्ण चिकित्सा” इसी खोज की एक विनम्र पहल है। इसका उद्देश्य केवल योग के शारीरिक अभ्यासों को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि मन, शरीर और भावनाओं के गहरे संबंध को समझाते हुए एक समग्र उपचार दृष्टिकोण प्रदान करना है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि हमारी भावनाएँ केवल मानसिक अनुभव नहीं हैं, बल्कि वे शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों को प्रभावित करती हैं। जब इन भावनाओं को दबाया जाता है या अनदेखा किया जाता है, तो वे धीरे-धीरे शारीरिक लक्षणों के रूप में प्रकट होने लगती हैं।
इस पुस्तक में प्राचीन योग दर्शन-जैसे चित्त-वृत्ति, पंचकोश, और चक्र प्रणाली-को आधुनिक विज्ञान के दृष्टिकोण के साथ जोड़ा गया है। साथ ही, प्राणायाम, ध्यान, माइंडफुलनेस और आत्म-जागरूकता जैसे व्यावहारिक उपकरणों के माध्यम से यह बताया गया है कि व्यक्ति अपने जीवन में संतुलन कैसे स्थापित कर सकता है। प्रत्येक अध्याय में न केवल सिद्धांतों की व्याख्या की गई है, बल्कि वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों और अनुभवों के माध्यम से उन्हें समझने का प्रयास भी किया गया है।
यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए है जो अपने स्वास्थ्य को केवल दवाइयों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उसे एक समग्र प्रक्रिया के रूप में समझना चाहते हैं। चाहे आप एक विद्यार्थी हों, पेशेवर हों, चिकित्सक हों या योग साधक-यह पुस्तक आपको अपने भीतर की यात्रा शुरू करने के लिए प्रेरित करेगी।
अंततः, यह पुस्तक केवल जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि परिवर्तन की दिशा में एक कदम उठाने के लिए लिखी गई है। जब हम अपने शरीर की मौन भाषा को सुनना सीखते हैं और अपनी भावनाओं को समझते हैं, तभी सच्चे अर्थों में उपचार संभव होता है।

About the Author

राखी आर. गुगळे एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त योग विशेषज्ञ, शोधार्थी, प्रशिक्षक और पुणे स्थित “वेद ब्रह्मा योग क्लासेस” की संस्थापक हैं। वे पिछले एक दशक से अधिक समय से योग के अभ्यास, शिक्षण और शोध से जुड़ी हुई हैं तथा योग को समग्र स्वास्थ्य, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन की जीवनशैली के रूप में समाज तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

वे एशियन योग चैंपियन एवं राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता हैं और एक प्रमाणित राष्ट्रीय योग रेफरी के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। योग चिकित्सा, प्राणायाम, ध्यान, चक्र साधना और भावनात्मक संतुलन उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र है।

वर्तमान में वे योग विषय में पीएच.डी. कर रही हैं, जिसमें उनका शोध रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं पर योग के प्रभाव पर केंद्रित है। उनके मार्गदर्शन में देश-विदेश के अनेक साधक योग से जुड़े हैं। उनका उद्देश्य योग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ, संतुलित और जागरूक जीवन की ओर प्रेरित करना है।

Book Details

ISBN: 9789375596356
Publisher: WISSIRA RESEARCH LAB
Number of Pages: 149
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

योग, प्राणायाम और भावनात्मक संतुलन: शरीर व मन की संपूर्ण चिकित्सा

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