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छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा : हिंदवी स्वराज्य का घोषणापत्र (eBook)

छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का इतिहास, अर्थ, हिंदवी स्वराज्य की विचारधारा, संस्कृत श्लोक का विश्लेषण, नेतृत्व और राष्ट्रनिर्माण पर आधारित विस्तृत हिंदी ईबुक।
Type: e-book
Genre: Religion & Spirituality, History
Language: Hindi
Price: ₹299
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा : हिंदवी स्वराज्य का घोषणापत्र

क्या किसी राज्य की पहचान केवल उसकी सीमाओं से होती है, या उसके आदर्शों, मूल्यों और संकल्पों से भी? छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा इस प्रश्न का ऐतिहासिक उत्तर प्रस्तुत करती है।

यह ईबुक केवल एक राजकीय मुहर का वर्णन नहीं करती, बल्कि उस महान विचारधारा का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है जिसने हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी। शिवाजी महाराज की राजमुद्रा भारतीय इतिहास के सबसे प्रेरणादायक दस्तावेज़ों में से एक मानी जाती है। इसमें निहित संस्कृत श्लोक केवल शासकीय पहचान नहीं, बल्कि न्याय, जनकल्याण, आत्मसम्मान, राष्ट्रनिर्माण और सुशासन का शाश्वत संदेश देता है।

"प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता।
शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते॥"

इस ईबुक में राजमुद्रा के प्रत्येक शब्द का ऐतिहासिक, भाषाई, सांस्कृतिक और दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि क्यों शिवाजी महाराज ने उस समय संस्कृत भाषा को अपनाकर भारतीय अस्मिता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का एक नया अध्याय प्रारंभ किया।

यह पुस्तक केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के लिए नेतृत्व, प्रशासन, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा का प्रेरणास्रोत है। इसमें हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा, मराठा साम्राज्य की स्थापना, प्रशासनिक दृष्टि, न्याय व्यवस्था, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा राष्ट्रनिर्माण के सिद्धांतों को सरल एवं शोधपरक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

इस ईबुक में आप जानेंगे

छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का सम्पूर्ण इतिहास

राजमुद्रा के संस्कृत श्लोक का शब्द-दर-शब्द अर्थ

"प्रतिपच्चंद्रलेखेव" का वास्तविक एवं प्रतीकात्मक महत्व

हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा

भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता

शिवाजी महाराज की प्रशासनिक दूरदर्शिता

सुशासन एवं जनकल्याण के सिद्धांत

नेतृत्व (Leadership) के प्रेरणादायक सूत्र

आधुनिक भारत में राजमुद्रा की प्रासंगिकता

युवाओं के लिए राष्ट्रनिर्माण का संदेश

प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य

यह ईबुक किनके लिए उपयोगी है?

✔ इतिहास प्रेमियों

✔ UPSC अभ्यर्थियों

✔ MPSC विद्यार्थियों

✔ SSC

✔ Banking Exams

✔ Railway Exams

✔ NET/JRF

✔ शोधकर्ताओं

✔ शिक्षक

✔ महाविद्यालयीन विद्यार्थी

✔ भारतीय संस्कृति के अध्ययनकर्ता

✔ नेतृत्व एवं प्रबंधन सीखने वाले पाठक

✔ छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए

इस पुस्तक की विशेषताएँ

सरल एवं प्रभावी हिंदी भाषा

ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित अध्ययन

संस्कृत श्लोक की विस्तृत व्याख्या

भारतीय राष्ट्रचेतना का विश्लेषण

नेतृत्व एवं प्रशासनिक सिद्धांत

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी

आधुनिक संदर्भों सहित विश्लेषण

शोधपरक एवं संदर्भ योग्य सामग्री

अंतरराष्ट्रीय स्तर की ईबुक प्रस्तुति

डिजिटल रीडिंग के लिए उपयुक्त स्वरूप

इस ईबुक को क्यों पढ़ें?

आज जब नेतृत्व, सुशासन और सांस्कृतिक पहचान पर विश्वभर में चर्चा हो रही है, तब छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा हमें यह सिखाती है कि एक महान राष्ट्र केवल शक्ति से नहीं, बल्कि न्याय, प्रजा के कल्याण, दूरदृष्टि और नैतिक नेतृत्व से निर्मित होता है।

यदि आप भारतीय इतिहास के इस गौरवशाली अध्याय को गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह ईबुक आपके लिए एक अमूल्य ज्ञान-संग्रह सिद्ध होगी।

यह केवल एक ऐतिहासिक अध्ययन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, स्वराज्य की भावना और राष्ट्रनिर्माण के महान संकल्प का प्रेरक दस्तावेज़ है।

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About the Author

अमोल महाजन एक स्वतंत्र लेखक, शोधकर्ता एवं डिजिटल प्रकाशन क्षेत्र से जुड़े साहित्यकार हैं। भारतीय इतिहास, संस्कृति, प्रेरणादायक व्यक्तित्वों, राष्ट्रनिर्माण, आध्यात्मिक विषयों तथा ज्ञानवर्धक साहित्य के अध्ययन और लेखन में उनकी विशेष रुचि है।

उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विषयों पर अनेक ई-पुस्तकों का लेखन और प्रकाशन किया है। उनका उद्देश्य जटिल एवं महत्वपूर्ण विषयों को सरल, रोचक और प्रमाणिक रूप में पाठकों तक पहुँचाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग भारतीय इतिहास, संस्कृति और प्रेरणादायक विरासत से परिचित हो सकें।

"छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा : हिंदवी स्वराज्य का घोषणापत्र" पुस्तक के माध्यम से लेखक ने शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक राजमुद्रा में निहित राष्ट्रदृष्टि, नेतृत्व, सुशासन और जनकल्याण के सिद्धांतों को गहराई से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह पुस्तक केवल एक ऐतिहासिक अध्ययन नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

लेखक का मानना है कि इतिहास केवल अतीत का वर्णन नहीं होता, बल्कि वह भविष्य को दिशा देने वाली प्रेरक शक्ति है। इसी विचार के साथ वे शोधपूर्ण, तथ्याधारित और पाठक-केंद्रित साहित्य के निर्माण के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

लेखक का संदेश

"जब हम अपने इतिहास को समझते हैं, तभी हम अपने वर्तमान को मजबूत और भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा केवल एक शाही मुहर नहीं, बल्कि स्वाभिमान, न्याय, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का अमर संदेश है।"

— अमोल महाजन

जय भवानी । जय शिवाजी ।

Book Details

ISBN: 9788168731349
Publisher: AKM PUblication
Number of Pages: 190
Availability: Available for Download (e-book)

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छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा : हिंदवी स्वराज्य का घोषणापत्र

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