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RSS: एक शताब्दी की यात्रा
1925 से 2026 तक की एक विस्तृत, शोध-आधारित और बहु-दृष्टिकोण वाली यात्रा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिसे सामान्यतः RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के नाम से जाना जाता है, भारत के आधुनिक इतिहास में सबसे अधिक चर्चित और प्रभावशाली सामाजिक-संगठनों में से एक रहा है। 1925 में नागपुर से शुरू हुई इसकी यात्रा एक शताब्दी के दौरान भारतीय समाज, संस्कृति, संगठनात्मक जीवन और सार्वजनिक विमर्श के अनेक महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ी रही है।
“RSS: एक शताब्दी की यात्रा” इसी लंबी यात्रा को 1925 से 2026 तक एक व्यापक ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ में समझने का प्रयास है।
यह पुस्तक केवल RSS की स्थापना की कहानी नहीं है। इसमें संगठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, प्रमुख नेतृत्व, शाखा व्यवस्था, स्वयंसेवक संस्कृति, संगठनात्मक संरचना, विचारधारा, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता, सेवा कार्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, आपदा राहत और सामाजिक गतिविधियों जैसे अनेक पहलुओं को विस्तार से समझने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में RSS के इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 1948 का प्रतिबंध, 1975 का आपातकाल और दूसरा प्रतिबंध, 1992 का अयोध्या घटनाक्रम और उसके बाद का प्रतिबंध, तथा स्वतंत्र भारत के विभिन्न दशकों में संगठन के विकास को ऐतिहासिक संदर्भ में देखा गया है।
इसके साथ ही RSS और भारतीय राजनीति, भारतीय जनसंघ, BJP, राम जन्मभूमि आंदोलन और व्यापक रूप से प्रयुक्त “Sangh Parivar” की अवधारणा को भी अलग-अलग संदर्भों में समझने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष RSS की आलोचनाओं और विवादों को समझना भी है। किसी भी बड़े ऐतिहासिक संगठन को केवल उसके समर्थकों के दृष्टिकोण से या केवल उसके आलोचकों के दृष्टिकोण से समझना पर्याप्त नहीं है। इसलिए इस पुस्तक में संगठन के आधिकारिक दृष्टिकोण के साथ-साथ उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों, सार्वजनिक दस्तावेजों, न्यायिक संदर्भों, स्वतंत्र शोध और विभिन्न व्याख्याओं को समझने का प्रयास किया गया है।
इस पुस्तक में आपको क्या मिलेगा?
• RSS की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
• डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का योगदान
• माधव सदाशिव गोलवलकर और अन्य प्रमुख नेतृत्व
• शाखा और स्वयंसेवक व्यवस्था
• RSS की संगठनात्मक संरचना
• RSS की विचारधारा और प्रमुख अवधारणाएँ
• हिंदू राष्ट्र और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
• सामाजिक समरसता और सेवा कार्य
• शिक्षा, ग्रामीण विकास और सामाजिक गतिविधियाँ
• 1948, 1975 और 1992 के प्रतिबंध
• Emergency और RSS
• RSS और भारतीय राजनीति
• भारतीय जनसंघ और BJP के साथ संबंधों का संदर्भ
• राम जन्मभूमि आंदोलन
• Sangh Parivar की अवधारणा
• RSS से जुड़े प्रमुख विवाद और आलोचनाएँ
• RSS के सामाजिक एवं सेवा कार्य
• 1925 से 2026 तक की विस्तृत Timeline
• प्रमुख व्यक्तित्व और संगठनात्मक शब्दावली
• 25 महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर
• References और research sources
• 100 वर्षों की यात्रा और भविष्य की दिशा
एक पुस्तक, अनेक दृष्टिकोण
इस पुस्तक का उद्देश्य किसी विचारधारा या संगठन का प्रचार करना अथवा उसका विरोध करना नहीं है।
इसका उद्देश्य पाठकों को पर्याप्त ऐतिहासिक संदर्भ, तथ्य, घटनाएँ और विभिन्न दृष्टिकोण उपलब्ध कराना है, ताकि वे विषय को स्वयं समझ सकें और अपनी स्वतंत्र राय बना सकें।
क्योंकि इतिहास को समझने के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि “क्या हुआ?”
यह समझना भी आवश्यक है कि—
क्या हुआ?
क्यों हुआ?
उसका प्रभाव क्या पड़ा?
और समय के साथ उसकी व्याख्या कैसे बदली?
1925 से 2026 — एक शताब्दी की यात्रा
2025 में RSS ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। इसलिए 2026 के संदर्भ में इसकी शताब्दी-यात्रा को समझना आधुनिक भारत के सामाजिक और वैचारिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को देखने का अवसर भी है।
यदि आप RSS का इतिहास, विचारधारा, संगठन, सामाजिक कार्य, प्रमुख व्यक्तित्व, महत्वपूर्ण घटनाएँ, राजनीतिक संदर्भ, विवाद और वर्तमान स्वरूप एक ही पुस्तक में व्यापक रूप से समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक उपयोगी अध्ययन-सामग्री हो सकती है।
पढ़िए। समझिए। प्रश्न कीजिए। अपनी राय बनाइए।
RSS : एक शताब्दी की यात्रा
1925–2026
Author: Amol Mahajan
Publisher: AKM Publication
Knowledge • Growth • Success
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