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शिव नहीं हूँ मैं (eBook)

Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹200
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

'शिव नहीं हूँ मैं' की कविताएँ मेरे दैनंदिन सांसारिक जीवन में गृहस्थ धर्म निभाते हुए उत्पन्न विचार-संघर्षों का परिणाम हैं। एक सामान्य व्यक्ति प्रतिदिन, हर क्षण कैसे रोजी-रोटी, धर्म-समाज, रिश्ते-नाते, संस्कार-नैतिकता, सबके बीच में निरंतर सामंजस्य स्थापित करने का प्रयत्न करता है; एकांत के क्षणों में, आत्मावलोकन से उसके मन में कितने सारे सही, गलत, उचित, अनुचित, के प्रश्न उठते हैं; और कैसे उन सारे प्रश्नों के बीच वह अपना जीवन जीता है, इस संकलन की कविताएँ उन्हीं प्रश्नों, उन्हीं अनुभूतियों को शब्दों में व्यक्त करने की कोशिश करती हैं। बहुत सारे ये प्रश्न सार्वभौमिक हैं; और प्राचीन काल से अब तक कितने ऋषियों, मनीषियों और विचारकों ने उन प्रश्नों पर विचार किया है, उनका उत्तर पाने की कोशिश की है। परन्तु मेरी कविताएँ उन प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास नहीं करतीं; बस बताने की कोशिश करती हैं कि इन प्रश्नों से घिरा व्यक्ति कैसा अनुभव करता है। जैसे, शीर्षक कविता की इन पंक्तियों में देखिये, “शिव नहीं हूँ मैं, कि सबके बदले ज़हरपी लूँगा; बुद्ध नहीं हूँ मैं, कि भिक्षाटन कर जी लूँगा। सांसारिक हूँ; कुछ जरूरतें, कुछ चाहतें हैं; कुछ दायित्व लिए अनगिनत संबंध नाते हैं। मगर, तुम मत घबराना; इनके लिये तुमसे न कोई अंबर, न मही लूँगा। दुनिया में बँटा रहता हूँ; सुख-दुःख सहता हूँ। मेरे कितने हिस्से हैं; न जाने कितने क़िस्से हैं। हे प्रभु, तुम बस आस-प्रयास बनाए रखना; अलग-अलग टुकड़ों से, एक पूरा जीवन सी लूँगा”…। और, 'अपनी मंज़िल, अपना सफ़र' की इन पंक्तियों में, …"न पूर्ण योगी, न पूर्ण भोगी; न पूर्ण स्वस्थ, न पूर्ण रोगी; न पूर्ण मेरी पहचान कोई; महज़ मैं एक संबंध उपयोगी। सबका अधिकार है मुझपर; पर मैं न किसी की ज़िम्मेदारी, जो याद आए, जब काम आए; धर्म, आज्ञा-पालन में रत संसारी”...।

About the Author

बिहारशरीफ (बिहार) में जन्म। बीएससी, सिविल इंजीनियरिंग; एमएससी, हाइड्रोलॉजी; मास्टर इन एनवायर्नमेंटल लॉ एवं पीएचडी की उपाधियाँ प्राप्त। सन 1997 में ऑस्ट्रेलिया आगमन। ऑस्ट्रेलियाई पब्लिक सर्विस में एक चौथाई सदी की सेवा के बाद निवृत। हिंदी साहित्य में गहरी रूचि। सामुदायिक कार्यक्रमों, कवि गोष्ठियों, स्थानीय रेडियो पर कविता-पाठ, पत्र-पत्रिकाओं, सम्पादित संस्मरण, कथा, एवं काव्य संकलनों में प्रकाशित रचनाओं आदि द्वारा ऑस्ट्रलिया में हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान। तीन काव्य संग्रह प्रकाशित – ‘खामोशियाँ’ (कलावती प्रकाशन); ‘तन्हाईयाँ’ (कलावती प्रकाशन); ‘चिरागों की कतार’ (कलावती प्रकाशन)।

Book Details

Number of Pages: 99
Availability: Available for Download (e-book)

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