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भारतीय सनातन परंपरा में पूजा, उपासना और आराधना का विशेष महत्व है। आरती इसी उपासना परंपरा का एक अत्यंत श्रद्धापूर्ण अंग है। दीपक की ज्योति के समक्ष आरती गाते समय भक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण की भावना व्यक्त करता है।
‘संपूर्ण आरती संग्रह’ प्रस्तुत करने का उद्देश्य विभिन्न देवी-देवताओं, भगवान के विविध स्वरूपों, प्रमुख तीर्थों, लोकदेवताओं तथा संत परंपराओं में प्रचलित प्रमाणित आरतियों को एक स्थान पर उपलब्ध कराना है, ताकि श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के समय आवश्यक आरती सहज रूप से प्राप्त हो सके।
इस संग्रह में आरतियों को देव-परंपरा और विषय के अनुसार क्रमबद्ध करने का प्रयास किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में एक ही आरती के शब्दों अथवा पंक्तियों में कुछ भिन्नताएँ मिल सकती हैं। ऐसे पाठांतर भारतीय लोक एवं धार्मिक परंपरा की स्वाभाविक विविधता का हिस्सा हैं। यह संग्रह किसी एक क्षेत्र, संप्रदाय या पूजा-पद्धति तक सीमित न होकर भारतीय भक्ति-परंपरा की विविधता को एकसाथ प्रस्तुत करने का प्रयास है।
देश के अलग-अलग प्रदेशों में देवी-देवताओं, तीर्थों, लोकदेवताओं और संतों की अनेक आरतियाँ गाई जाती हैं। कुछ आरतियाँ पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं, जबकि कुछ विशेष क्षेत्रों या मंदिरों की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई हैं। इसी विविधता को ध्यान में रखते हुए इस संग्रह में गणेश जी, शिव जी, विष्णु जी, श्रीराम, श्रीकृष्ण, देवी के विभिन्न स्वरूपों, नवग्रहों, पवित्र नदियों, प्रमुख तीर्थों, लोकदेवताओं तथा संत परंपरा से संबंधित आरतियों को विषयानुसार क्रमबद्ध करने का प्रयास किया गया है।
इस पुस्तक का उद्देश्य पाठक को एक ऐसा उपयोगी आरती-संग्रह उपलब्ध कराना है, जिसमें दैनिक पूजा, व्रत, पर्व, धार्मिक अनुष्ठान तथा विशेष अवसरों पर आवश्यक आरती सहज रूप से प्राप्त हो सके। आरती का मूल भाव श्रद्धा, विश्वास, प्रेम और समर्पण है। अतः पाठक अपनी पारिवारिक, क्षेत्रीय अथवा धार्मिक परंपरा के अनुसार आरती की विधि का पालन कर सकते हैं।
आशा है कि यह आरती संग्रह घर, मंदिर, पूजा-स्थल तथा धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा और भक्ति-भाव को सुदृढ़ करने में सहायक बनेगा।
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