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अनुक्रमणिका
अध्याय
१ कुणालक नाट्य-संसार : लोकनाट्य, शास्त्र आ समीक्षा 4
२ चालिस चोर आ गोनू झा उर्फ ज्ञान झाक खिस्सा 22
३ बिदापत : लोक आ शास्त्रक रंगसंवाद 31
४ कुसमा-सलहेस : लोकगाथा आ जनचेतना 40
५ प्रेम-प्रतिज्ञा उर्फ श्रुवावतीक जय! 49
६ विश्वासक शक्ति उर्फ सुकन्याक विवाह 58
७ प्रेमक विस्तार उर्फ श्वेताक आविष्कार 66
८ प्रेमक परीक्षा उर्फ सुप्रभा आ अष्टावक्र 75
९ विद्यापतिक १०० पद : जुवती भए जनमए जनु कोइ 83
१० रंगायन : मैथिली रंगचेतनाक आलोचनात्मक अध्ययन 114
विस्तृत ग्रन्थसूची 127
नवम अध्यायमे विद्यापतिक सभ १०० पदक स्वतन्त्र विवेचन आ पदवार पृष्ठ-सूची; दशम अध्यायमे “रंगायन”क सभ ४५ प्रविष्टिक समीक्षा आ आलेख-सूची संकलित अछि।
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