You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution

Add a Review

S4, 37, Middle Berth

एस–4, 37, मिडिल बर्थ
K. Hemant, HEMANT KUMAR
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹399 + shipping
Price: ₹399 + shipping
Dispatched in 5-7 business days.
Shipping Time Extra

Description

क्या सच में प्रेम सिर्फ एक भावना है… या एक सफर, जो हमें बदल देता है?

"S4, 37, मिडिल बर्थ" एक ऐसी कहानी है जो आपको एक साधारण यात्रा के भीतर छिपे असाधारण प्रेम से रूबरू कराएगी। यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि उम्मीद, इंतज़ार और त्याग का वो एहसास है जिसे हर दिल कहीं न कहीं जीता है।

इस पृथ्वी का सबसे जिद्दी और रहस्यमय चरित्र यदि कोई है तो वह स्त्री है। उसे परिभाषाओं में बाँधा नहीं जा सकता, उसे अधिकार से जीता नहीं जा सकता और उसे तर्क से पूरी तरह समझा नहीं जा सकता। उसे पूरी तरह समझ लेने का दावा करना स्वयं एक भ्रम है। वह स्वयं में एक स्वतंत्र संसार है। उसे केवल प्रेम से स्पर्श किया जा सकता है, उसे केवल प्रेम से समझाया जा सकता है और उसे केवल प्रेम से ही समझा जा सकता है।
किंतु विडंबना यह है कि वह प्रेम, जो सच में उसके भीतर तक उतर सके, अत्यंत दुर्लभ होता है, क्योंकि उस प्रेम को केवल कहकर नहीं, बल्कि सचमुच प्रेम करके दिखाना पड़ता है। और ऐसा प्रेम करने वाला व्यक्ति बहुत विरला जन्म लेता है।

इस उपन्यास के दो पात्र भी इसी आयु-सीमा में खड़े हैं। इस कथा की युवती अनुशासित है, घर से स्पष्ट सीख लेकर निकली हुई कि उसे अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होना है; उसे पढ़ाई करनी है, भविष्य बनाना है, दूरी बनाए रखनी है। वह सजग है, संयत है, और दुनिया को एक सीमित दायरे से देखती है। दूसरी ओर कार्तिक है, जो घर का लाड़ला, स्नेह में पला, थोड़ा अल्हड़, अभी जिम्मेदारियों की कठोरता से अनभिज्ञ। आरंभ में वह युवती उसे देखना भी नहीं चाहती; उसके भीतर सावधानी है। पर जीवन के मिडिल बर्थ में भावनाएँ तर्क से अधिक तीव्र होती हैं। सिवान से इलाहाबाद तक की इस यात्रा में समय उनके बीच संवाद की एक पतली-सी रेखा खींच देता है। इस यात्रा में, बिना किसी बाहरी संघर्ष के, बिना किसी खलनायक के, उनके बीच जो जन्म लेता है, वह केवल प्रेम है; न वादा, न बंधन, न विद्रोह; केवल सहज स्वीकृति।

यह कथा उसी लाखों में एक कार्तिक की है। वह कोई असाधारण नायक नहीं, बल्कि एक साधारण युवक है; पर उसके प्रेम की सादगी असाधारण है। उसने किसी तर्क, आग्रह या प्रदर्शन से नहीं, बल्कि अपने सीधे और सच्चे प्रेम से एक जिद्दी और रहस्यमयी स्त्री के हृदय पर ऐसा प्रहार किया कि उसकी वर्षों पुरानी पहेली धीरे-धीरे सुलझने लगी। उसने उसे जीतने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसे समझने का धैर्य रखा। उसके प्रेम में न शोर था, न दावा; केवल निरंतरता और विश्वास था। और शायद यही कारण था कि जो स्त्री किसी के आगे नहीं झुकी, वह उसके प्रेम के सामने पिघल गई। कार्तिक ने कुछ असाधारण करके नहीं, बल्कि प्रेम को सचमुच जीकर वह कर दिखाया, जिसे सच में जी पाना हर किसी के बस की बात नहीं।

सन् 2000 में, सिवान से इलाहाबाद तक की एक दिन की रेलयात्रा में घटित यह कथा बाहर से भले ही सीमित लगे, पर भीतर से यह जीवन के एक अत्यंत सूक्ष्म और सच्चे अनुभव को पकड़ने का प्रयास है। यह मेरा पहला उपन्यास है। संभव है कि इसमें अनुभव की परिपक्वता न हो, पर इसमें उस विश्वास की सच्चाई अवश्य है कि निष्पाप प्रेम आज भी संभव है।

— यदि पाठक इस एक दिन के सफ़र में अपने जीवन के उस “बीच” की स्मृति पा सकें, जब प्रेम सरल था और भविष्य अभी बोझ नहीं बना था, जहाँ उन्होंने कभी बिना शर्त प्रेम किया था या करने की इच्छा की थी, तो यह प्रयास सार्थक होगा।

— यदि इस उपन्यास को पढ़कर आपके भीतर कोई पुरानी धड़कन हल्की-सी तेज हो जाए, यदि आपको अपने जीवन का कोई अधूरा “मिडिल बर्थ” याद आ जाए, तो समझिए यह कहानी आपको पुकार रही है, क्योंकि कुछ यात्राएँ गंतव्य पर समाप्त नहीं होतीं; वे मनुष्य के भीतर चलती रहती हैं, जब तक उसका अपर बर्थ उसे पुकार न ले।

About the Authors

लेखक परिचय — के. हेमंत

के. हेमंत समकालीन हिंदी लेखन में उभरती हुई संवेदनशील आवाज़ हैं। सरल भाषा में गहरे मानवीय भावों को व्यक्त करना उनकी लेखन-शैली की विशेषता है। वे जीवन के साधारण दिखने वाले क्षणों में छिपी असाधारण संवेदनाओं को पकड़ने में विश्वास रखते हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, मनुष्य का अंतर्मन, संबंधों की जटिलता और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियाँ अत्यंत आत्मीयता और सहजता के साथ उभरती हैं।
हिंदी साहित्य के विद्यार्थी होने के कारण भाषा और भाव दोनों पर उनकी स्वाभाविक पकड़ है। वे मानते हैं कि सच्चा साहित्य वही है जो पाठक के मन को केवल स्पर्श ही न करे, बल्कि उसके भीतर कहीं गहरे उतर जाए। इसी विश्वास के साथ वे अपने लेखन में समाज, मानवीय संबंधों और मन की अनकही परतों को अभिव्यक्त करने का प्रयास करते हैं।
उनका प्रथम उपन्यास “एस–4, 37, मिडिल बर्थ” एक अनोखे कथ्य और प्रतीकात्मक संरचना पर आधारित है। एक रेलयात्रा की पृष्ठभूमि में रचा गया यह उपन्यास मानवीय संबंधों, स्त्री-मन की विभिन्न अवस्थाओं और निष्पाप प्रेम की गहरी संवेदना को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। इस कथा में “मिडिल बर्थ” केवल एक सीट नहीं, बल्कि जीवन का वह मध्य है जहाँ मनुष्य अपने अनुभवों, स्मृतियों और भावनाओं के साथ गुजरता है।
के. हेमंत का विश्वास है कि साहित्य का उद्देश्य केवल कथा कहना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सोई हुई संवेदनाओं को जगाना है। वे चाहते हैं कि उनकी रचनाएँ पाठकों के मन में एक ऐसी छाप छोड़ें, जो पढ़ने के बाद भी लंबे समय तक उनके भीतर जीवित रहे।

Book Details

Number of Pages: 368
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

S4, 37, Middle Berth

S4, 37, Middle Berth

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book S4, 37, Middle Berth.

Other Books in Literature & Fiction

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.