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जाति-व्यवस्था और मैं
भारतीय समाज में जाति व्यवस्था एक ऐसा विषय है, जिसने सदियों से सामाजिक संरचना, संबंधों और मानव जीवन को प्रभावित किया है। यह पुस्तक जाति व्यवस्था के इतिहास, सामाजिक प्रभावों और वर्तमान संदर्भों को समझने का एक प्रयास है।
इस पुस्तक में जाति, समाज और व्यक्ति के बीच के संबंधों पर विचार करते हुए भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों — समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व — के दृष्टिकोण से सामाजिक व्यवस्था का अध्ययन किया गया है।
"जाति-व्यवस्था और मैं" केवल एक सामाजिक विषय की चर्चा नहीं है, बल्कि यह एक प्रश्न है कि हम एक ऐसे समाज की ओर कैसे बढ़ सकते हैं जहाँ व्यक्ति की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके विचारों, कर्मों और मानव मूल्यों से निर्धारित हो।
यह पुस्तक इतिहास, समाज और संविधान के बीच संबंधों को समझने तथा सामाजिक परिवर्तन की दिशा में विचार करने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।
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