You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
कुछ कहानियाँ इसलिए लिखी जाती हैं
क्योंकि हमारे भीतर कुछ होता है,
जिसे हम दुनिया से कहना चाहते हैं।
और कुछ कहानियाँ इसलिए जन्म लेती हैं
क्योंकि कुछ बातें ऐसी होती हैं
जिन्हें हम कभी कह नहीं पाते।
यह कहानी उन्हीं अनकही बातों में से एक है।
आप जो पढ़ने जा रहे हैं,
वह एक काल्पनिक कथा है।
इसकी दुनिया भावनाओं, स्मृतियों, अनुभवों
और उन छोटे-छोटे पलों से बनी है
जो कभी हमारे भीतर बहुत गहरे उतर जाते हैं।
कहानी के कुछ पल बदले गए हैं,
कुछ संवाद नए सिरे से रचे गए हैं,
और कुछ विवरण कथा की ज़रूरत के अनुसार
कल्पना का रूप ले चुके हैं।
लेकिन इस कहानी में सबसे महत्वपूर्ण
घटनाएँ नहीं हैं—
बल्कि वे भावनाएँ हैं
जो उनके पीछे छूट जाती हैं।
मेरा हमेशा से मानना रहा है
कि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में
बिना किसी चेतावनी के आते हैं
और चले जाने के बाद भी
अपने होने की एक ख़ामोश-सी जगह छोड़ जाते हैं।
वक़्त बीतता रहता है…
साल गुज़र जाते हैं। मगर कभी कोई नाम, कोई आवाज़, कोई जगह
या बस एक छोटा-सा पल
अचानक बीती हुई पूरी दुनिया
हमारे सामने वापस ला देता है।
यह किताब उन्हीं पलों के बारे में है।
यह प्रेम के बारे में है,
दूरी के बारे में है,
लगाव और अकेलेपन के बारे में है—
और उन अजीब घरों के बारे में भी,
जो हम कभी-कभी
दूसरे इंसानों में खोज लेते हैं।
मैं नहीं जानता
इन पन्नों को पढ़ते हुए
आप क्या महसूस करेंगे।
शायद आपको कोई अपना याद आए।
शायद आप किसी को
पहले से थोड़ा बेहतर समझ पाएँ।
या शायद कहानी के किसी मोड़ पर
आपको अपने भीतर का
कोई छोटा-सा हिस्सा दिखाई दे जाए।
आपको यहाँ जो भी मिले,
उसे कुछ देर अपने साथ रहने दीजिए।
क्योंकि कुछ कहानियाँ
सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं होतीं।
वे महसूस किए जाने के लिए होती हैं।
— मखदूम रजा
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book Banjare Ka Gumnam Ghar.