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संघर्ष से सृजन तक

आत्मकथा
Naval Kishor Soni
Type: Print Book
Genre: Education & Language, Biographies & Memoirs
Language: Hindi
Price: ₹165 + shipping
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Description

जीवन एक यात्रा है। इस यात्रा में कुछ पड़ाव हमारी इच्छा अनुसार आते हैं और कुछ परिस्थितियाँ हमें उन राहों पर ले जाती हैं, जिनकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि मेरा जीवन भी ऐसे ही अनेक मोड़ों, संघर्षों, सीखों और अनुभवों से होकर गुज़रा है।
मैं कोई महान व्यक्ति नहीं हूँ। मैं राजस्थान के बाराँ जिले के छोटे से कस्बे मांगरोल का वह साधारण बालक हूँ, जिसने सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने का साहस किया। अपने से एक छोटे, तीन बड़े भाइयों और तीन बड़ी बहिनों के साथ पला-बढ़ा मैँ एक स्वर्णकार व्यवसायी के घर जन्मा । मेरी उम्र कोई 5-6 वर्ष की रही होगी तभी मेरे सर से माँ का साया उठ गया । इस हृदयविदारक आघात के बाद बचपन में कभी नहीं सोचा था कि जीवन मुझे शिक्षा, समाज सेवा, कानून और साहित्य जैसी विविध यात्राओं से परिचित कराएगा। मैं केवल इतना जानता था कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और ईमानदारी से चलने वाला रास्ता भले ही कठिन हो, लेकिन अंततः वही सबसे सुंदर मंज़िल तक पहुँचाता है।
मेरी यात्रा संघर्षों से शुरू हुई। एक छोटे कस्बे के विद्यालय से लेकर बाराँ के महाविद्यालय तक, छात्र राजनीति से लेकर समाज सेवा के क्षेत्र तक, गाँवों की पगडंडियों से लेकर राज्य स्तरीय शैक्षिक नीतियों तक, अदालतों से लेकर साहित्य की दुनिया तक । हर पड़ाव ने मुझे नया अनुभव दिया। कई बार सफलता मिली, कई बार असफलता भी मिली। कभी लोगों ने सराहा, कभी आलोचना भी की। लेकिन हर अनुभव ने मुझे पहले से अधिक परिपक्व बनाया।
लगभग पच्चीस वर्षों तक देश की विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक संस्थाओं के साथ कार्य करते हुए मैंने हजारों गाँव देखे, अनगिनत शिक्षकों से सीखा, लाखों बच्चों के सपनों को करीब से महसूस किया और यह जाना कि शिक्षा केवल विद्यालयों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। मैंने उन बेटियों की आँखों में भविष्य देखा, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ना चाहती थीं। मैंने उन शिक्षकों का समर्पण देखा, जो सीमित संसाधनों में भी पीढ़ियों का निर्माण कर रहे थे। मैंने उन अभिभावकों का विश्वास देखा, जिन्होंने अपनी उम्मीदें शिक्षा के हाथों में सौंप दी थीं। इन्हीं अनुभवों ने मुझे भीतर से बदल दिया। समाज सेवा ने मुझे संवेदनशील बनाया। शिक्षा ने मुझे दिशा दी। कानून ने मुझे न्याय का महत्व समझाया और लेखन ने मुझे स्वयं से संवाद करना सिखाया।
कई लोगों ने मुझसे पूछा कि आत्मकथा लिखने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई ?
मेरा जवाब हमेशा एक ही रहा कि यह पुस्तक मेरी उपलब्धियों का विवरण नहीं है। यह उन सीखों का संकलन है, जो मुझे जीवन ने दीं। यह उन लोगों के प्रति मेरी कृतज्ञता है, जिन्होंने मुझे गढ़ा। यह उन संघर्षों का लेखा-जोखा है, जिन्होंने मुझे मजबूत बनाया। और यह उन सपनों की कहानी है, जिन्होंने मुझे कभी रुकने नहीं दिया।

मैंने इस पुस्तक में स्वयं को नायक बनाकर प्रस्तुत करने का प्रयास नहीं किया है। मैंने अपने जीवन को उसी रूप में लिखने का प्रयास किया है, जैसा मैंने उसे जिया है, उसकी सफलताओं के साथ, उसकी असफलताओं के साथ, उसकी खुशियों और उसकी पीड़ाओं के साथ। मेरा विश्वास है कि आत्मकथा तभी सार्थक होती है, जब उसमें सच बोलने का साहस हो।
यदि इस पुस्तक को पढ़कर कोई विद्यार्थी अपने सपनों पर विश्वास करना सीख जाए, कोई शिक्षक अपने दायित्व पर और अधिक गर्व महसूस करे, कोई युवा ईमानदारी के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का संकल्प ले, या कोई अभिभावक अपनी बेटी की शिक्षा को नया महत्व दे तो मैं अपने लेखन को सफल मानूँगा।

About the Author

नवल किशोर सोनी
माता-पिता : स्व.श्रीमती कमला देवी, स्व. श्री लड्डू लाल सोनी
जन्म: 10 नवम्बर 1974, माँगरोल, जिला बारां, राजस्थान
जीवन संगिनी: श्रीमती मंजू सोनी (प्राध्यापिका, राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय, अजमेर)
पुत्री: नव्या सोनी (अध्ययनरत)
शिक्षा: एम.ए., बी.एड़., एल.एल.बी., एम.एस.डब्ल्यू.(समाज कार्य में स्नातकोत्तर)
सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव। साहित्य कलाओं में अभिरुचि। बोधि प्रकाशन, जयपुर से निराशाओं के पार काव्य संग्रह (2022) प्रकाशित, अर्पिता : एक देवदासी (उपन्यास) प्रकाशित, रिश्ता तेरा मेरा (दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी), उपन्यास (2026) प्रकाशित, कहानियों के आईने में जीवन कौशल (21वीं सदी के जीवन कौशलों पर आधारित कहानियाँ), शहर,स्पा और चंचल, आचूकी: अधूरी पढ़ाई से नई उड़ान तक, रक्तिम क्षितिज के उस पार, शिक्षा में सुधार : चुनौतियाँ एवं संभावनाएं -पुस्तक प्रकाशित (2026)। आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ (काव्य संग्रह) प्रकाशित, कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन।
'शिक्षा विमर्श' पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित। प्रतिलिपि ऐप पर निरंतर कविताएँ, कहानियाँ और लेख प्रकाशित। शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि। शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत। मृत्यु के बाद समस्त अंग और देह दान का संकल्प। यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग। समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच और तार्किक दुनिया के संस्थापक। वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न ।

सम्पर्क : मकान नंबर-15, विनायक विहार
गणपतपुरा, मानसरोवर,जयपुर 302020 (राजस्थान)
ई-मेल navalkishor.s@gmail.com

Book Details

ISBN: 9789359374765
Publisher: Naval Kishor Soni
Number of Pages: 80
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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