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Tujhe dekhane ko tarsa

प्रेम, पीड़ा और इंतज़ार का रहस्यमयी उपन्यास
NITIN KUMAR
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹599 + shipping
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Description

तुझे देखने को तरसा – आखिर गुनाह किसका था?

क्या हर अधूरी प्रेम कहानी में गलती किसी एक की होती है?पुस्तक विवरण

"तुझे देखने को तरसा" केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि उस अधूरी मोहब्बत की अमर गाथा है, जिसे समय, समाज और परिस्थितियाँ कभी मिटा नहीं सकीं। यह उन अनगिनत प्रेमियों की कहानी है, जिनकी मोहब्बत सच्ची तो थी, पर मुकम्मल नहीं हो सकी। लेखक नितिन कुमार ने इस कृति में प्रेम की वे अनुभूतियाँ शब्दों में ढाली हैं, जिन्हें अक्सर लोग अपने भीतर ही दफन कर देते हैं।

इस उपन्यास का प्रत्येक अध्याय प्रेम, विरह, प्रतीक्षा, त्याग और पीड़ा के ऐसे रंगों से सजा है कि पाठक स्वयं को कहानी का एक पात्र महसूस करने लगता है। यहाँ केवल दो प्रेमियों की कथा नहीं, बल्कि उन लाखों धड़कनों की आवाज़ है, जिन्हें समाज, जाति, धर्म, परिवार और परिस्थितियों ने एक-दूसरे से दूर कर दिया। फिर भी उनका प्रेम कभी समाप्त नहीं हुआ।

यह कहानी उस दर्द को व्यक्त करती है, जब किसी अपने की एक झलक पाने की चाह जीवन का सबसे बड़ा सपना बन जाती है। जब हर सुबह उसकी याद से शुरू होती है और हर रात उसी की प्रतीक्षा में समाप्त होती है। जब किसी का नाम सुनते ही दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं और उसकी अनुपस्थिति जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई बन जाती है।

लेखक ने अपनी संवेदनशील लेखनी से प्रेम के उन अनकहे पलों को जीवंत कर दिया है, जिन्हें शब्दों में बाँधना आसान नहीं होता। उपन्यास के अनेक प्रसंग इतने मार्मिक हैं कि पाठक स्वयं को पात्रों के साथ रोता, तड़पता और इंतज़ार करता हुआ महसूस कर सकता है। कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह किसी की कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की अधूरी कहानी हो।

यदि आपने कभी किसी से सच्चा प्रेम किया है… यदि आपने किसी के बिछड़ने की पीड़ा सही है… यदि आपने कभी किसी के लौट आने की उम्मीद में अनगिनत रातें जागकर बिताई हैं… तो यह उपन्यास आपके हृदय के उन कोनों को भी छू सकता है, जहाँ आज भी कोई अधूरी याद जीवित है।

"तुझे देखने को तरसा" प्रेम, पीड़ा, रहस्य और इंतज़ार का ऐसा साहित्यिक उपन्यास है, जो केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है। इसकी हर पंक्ति एक धड़कन है, हर अध्याय एक आह है और हर शब्द एक अधूरी मोहब्बत की पुकार।

संभव है कि इस पुस्तक को पढ़ते-पढ़ते आपकी आँखें नम हो जाएँ, क्योंकि इसमें केवल कहानी नहीं, बल्कि टूटे हुए सपनों, अधूरे वादों और अमर प्रेम की वे भावनाएँ समाई हैं जिन्हें समय भी मिटा नहीं सका।

यह उपन्यास उन सभी प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी मोहब्बत अधूरी रह गई, लेकिन जिनके दिलों में प्रेम आज भी जीवित है। यदि आप ऐसी कहानी पढ़ना चाहते हैं जो आपके मन को झकझोर दे, आपके हृदय को स्पर्श करे और पुस्तक समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक आपकी स्मृतियों में जीवित रहे, तो "तुझे देखने को तरसा" आपके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक अविस्मरणीय भावनात्मक यात्रा सिद्ध हो सकती है।

कभी-कभी एक अधूरी प्रेम कहानी पूरी ज़िंदगी से भी बड़ी हो जाती है… शायद यह उन्हीं कहानियों में से एक है।

यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि टूटे हुए भरोसे, बिछड़ते रिश्तों, गहरे दर्द और अंतहीन इंतज़ार की भावनात्मक यात्रा है। जब प्यार सच्चा हो, फिर भी दूरियाँ बढ़ जाएँ, तो दिल बार-बार यही सवाल पूछता है—आखिर गुनाह किसका था?

इस उपन्यास का हर अध्याय आपको प्रेम, पीड़ा, यादों और उन अनकहे जज़्बातों से रूबरू कराएगा जिन्हें शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। अगर आपने कभी किसी को दिल से चाहा है, किसी के इंतज़ार में रातें गुज़ारी हैं, या किसी अपने को खोने का दर्द महसूस किया है, तो यह कहानी आपको अपने जीवन का एक हिस्सा लगेगी।

"तुझे देखने को तरसा – आखिर गुनाह किसका था?" एक ऐसी भावनात्मक और रहस्यमयी कहानी है, जो आखिरी पन्ने तक आपको अपने साथ बाँधे रखेगी।

लेखक: नितिन कुमार

About the Author

लेखक परिचय

नितिन कुमार एक उभरते हुए हिंदी उपन्यासकार हैं, जो प्रेम, मानवीय भावनाओं और जीवन के गहरे अनुभवों को अपनी लेखनी के माध्यम से जीवंत रूप देते हैं। उनकी रचनाएँ प्रेम, पीड़ा, बिछड़न, उम्मीद और रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं। उनका उद्देश्य ऐसी कहानियाँ लिखना है जो पाठकों के दिल को छू जाएँ और लंबे समय तक उनकी यादों में बनी रहें।

"तुझे देखने को तरसा – आखिर गुनाह किसका था?" उनकी भावनात्मक और रहस्यमयी कृति है, जो प्रेम, इंतज़ार और अनकहे जज़्बातों की एक अनोखी यात्रा पर ले जाती है।

लेखक का अगला उपन्यास "तुझे देखने को तरसा" शीघ्र ही पाठकों के बीच उपलब्ध होगा।

– नितिन कुमार लेखक परिचय

नितिन कुमार हिंदी साहित्य के उभरते हुए युवा साहित्यकार हैं। उनकी लेखनी प्रेम, विरह, पीड़ा, प्रतीक्षा और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत मार्मिक एवं साहित्यिक शैली में अभिव्यक्त करती है। उनके उपन्यास केवल काल्पनिक कथाएँ नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविक अनुभूतियों और कल्पना का सशक्त संगम हैं।

उनकी प्रथम कृति "तुझे देखने को तरसा" तथा द्वितीय उपन्यास "अब तू दिखती नहीं" अधूरी मोहब्बत, सामाजिक बंधनों और प्रेम की अमर संवेदनाओं को गहराई से प्रस्तुत करते हैं। इन दोनों उपन्यासों में प्रेम के साथ रहस्य, भावनाएँ और जीवन का यथार्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

कम आयु में ही नितिन कुमार ने हिंदी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने का प्रयास किया है। उनकी रचनाओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठकों के हृदय में प्रेम, संवेदना और आत्मचिंतन की अनुभूति जगाना है।

यदि आप प्रेम, विरह, रहस्य और भावनाओं से परिपूर्ण साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं, तो नितिन कुमार की रचनाएँ आपको एक अविस्मरणीय साहित्यिक यात्रा पर ले जाएँगी।

— नितिन कुमार ✍️

Book Details

Publisher: Nitin kumar
Number of Pages: 571
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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