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बेहतर भविष्य का सपना कब एक ऐसे रास्ते में बदल जाता है जहाँ लौटना भी आसान नहीं रहता?
करनाल का एक साधारण परिवार अमेरिका में बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर निकलता है। उनकी यात्रा दिल्ली और दुबई से होते हुए बोगोटा, दारीएन के जंगल, मध्य अमेरिका, मेक्सिको और अंततः अमेरिकी सीमा तक पहुँचती है।
लेकिन सफल पहुँचने की तस्वीरें उस रास्ते की पूरी कहानी नहीं दिखातीं—न अनिश्चितता, न शोषण, न बीमारी, न अपराधियों का नियंत्रण, न वह मानवीय कीमत जो परिवारों को चुकानी पड़ सकती है।
द डंकी रोड एक काल्पनिक पारिवारिक कथा को दस्तावेज़ीकृत प्रवासन-जोखिमों और वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं की पृष्ठभूमि से जोड़ता है। यह पुस्तक वैध आव्रजन या वास्तविक शरण के विरुद्ध नहीं है। इसका केंद्रीय प्रश्न अधिक सरल और अधिक महत्वपूर्ण है:
क्या किसी सपने के लिए ऐसा खतरनाक शॉर्टकट चुनना उचित है जिसकी पूरी कीमत पहले कभी बताई ही न गई हो?
यह आशा, भ्रम, हानि, जिम्मेदारी और अंततः घर लौटने के साहस की मार्मिक कहानी है।
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