You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
‘यदा यदा ही धर्मस्य’ (सौभद्र-शौर्य काव्य) महाभारत के अमर योद्धा और अर्जुन-सुभद्रा के तेजस्वी पुत्र वीर अभिमन्यु के अप्रतिम शौर्य, स्वाभिमान एवं आत्मबलिदान को समर्पित एक ओजस्वी काव्य-कृति है। कुरुक्षेत्र के भीषण समर में जब कौरव पक्ष द्वारा चक्रव्यूह की अभेद्य रचना की गई, तब इस युवा महारथी ने अकेले ही अधर्म और अनीति के विरुद्ध प्रचंड पराक्रम का परिचय दिया। छह महारथियों के छल और जयद्रथ के अवरोध के सम्मुख भी जिसने अंतिम श्वास तक धर्म का ध्वज झुकने नहीं दिया, उसी सौभद्र के रण-कौशल और अमर गाथा का जीवंत व मार्मिक चित्रण इस प्रबंध-काव्य में प्रस्तुत किया गया है। यह कृति पाठकों के हृदय में कर्तव्य, धर्म और अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने की चेतना जाग्रत करती है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book यदा यदा हि धर्मस्य.