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पावस तरंग

RAJESH KUMAR TIWARI
Type: Print Book
Genre: Poetry, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹299 + shipping
This book ships within India only.
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Description

साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं, अपितु अंतश्चेतना का नाद और ईश्वरानुभूति का सहज प्रकटीकरण है। ज्ञान की अनवरत साधना, अठारह स्नातकोत्तर उपाधियों के अनुशीलन और बहुभाषाओं के अवगाहन ने मुझे यही सिखाया है कि प्रकृति ही परमात्मा का साक्षात् विग्रह है।

‘पावस तरंग’ का सृजन कालखंड १९९०-९१ की वह पावन वेला है, जब मेरी प्रथम कृति ‘इन्द्रधनुष’ (१९९०) के सृजन-उल्लास के समानांतर ही इस प्रबंध काव्य के छंद अंतःकरण में प्रस्फुटित हुए थे।

देवाधिदेव आशुतोष भगवान भोलेनाथ की अहैतुकी अनुकंपा से उस समय रचित यह काव्य-धरोहर आज अपने परिपूर्ण रूप में सहृदय पाठकों के सम्मुख आ रही है।

चार सुसंगठित सर्गों और ८६ छंदों में निबद्ध यह प्रबंध काव्य पावस के नयनाभिराम रूप-कौतुक से आरंभ होकर, उसके चंचल विलास, रौद्र विभीषिका और अंततः शांत यज्ञ-विराम व वसंत के नवसृजन तक की दार्शनिक यात्रा है।

तीन दशकों से अधिक समय तक हृदय में सहेजी गई इस सारस्वत साधना को पाठकों के कर-कमलों में सौंपते हुए मुझे असीम संतोष की अनुभूति हो रही है। यदि ये छंद पाठकों के अंतःकरण में प्रकृति-प्रेम

About the Author

# महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’

### लेखक, कवि, योगाचार्य, आध्यात्मिक विद्वान, महंत एवं आजीवन अधिगमकर्ता

महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’ एक भारतीय लेखक, कवि, योगाचार्य, आध्यात्मिक विद्वान तथा ज्योतिर्लिंग शिवमठ, लखनऊ के महंत हैं। वर्ष 1998 से वे ज्योतिर्लिंग शिवमठ की सेवा कर रहे हैं। उनका जीवन साहित्य, कविता, आध्यात्मिकता, शिक्षा, भारतीय संस्कृति, बौद्धिक अन्वेषण और सेवा का संगम है।

## शैक्षणिक यात्रा

महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’ ने विभिन्न संस्थानों से डिग्री एवं डिप्लोमा सहित कुल **18 शैक्षणिक प्रमाण-पत्र** प्राप्त किए हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में सूचना प्रणाली में MBA, LLB, मनोविज्ञान, ज्योतिष, संस्कृत, योग और हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर अध्ययन, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र में अध्ययन, भौतिकी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के साथ B.Sc., हिंदी, दर्शनशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान के साथ B.A., मध्यमा विशारद, NIELIT का ‘O’ Level तथा RTI में डिप्लोमा आदि शामिल हैं।

उनका शैक्षणिक अध्ययन मानविकी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, कानून, संस्कृत, योग और भारतीय दर्शन जैसे विविध क्षेत्रों तक विस्तृत है। उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड **1985 से 2024** तक के हैं। इन उपलब्धियों को **‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’** द्वारा मान्यता दी गई और उन्हें 18 शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के लिए **‘IBR Achiever’** घोषित किया गया। इस उपलब्धि की पुष्टि 23 सितंबर 2025 को प्रस्तुत रिकॉर्ड एवं साक्ष्यों के सत्यापन के बाद की गई।

## साहित्यिक यात्रा

महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’ युवावस्था से ही कविता और रचनात्मक लेखन से जुड़े रहे हैं। उनकी प्रारंभिक काव्य-कृति **‘जड़ावरण’** 1986 में 17 वर्ष की आयु में लिखी गई। वर्ष 1990 में उनकी महत्वपूर्ण कृति **‘इन्द्रधनुष’** प्रकाशित हुई। इसके बाद उनकी साहित्यिक यात्रा कविता, भक्ति-रचनाओं, दार्शनिक एवं चिंतनपरक लेखन तथा गद्य तक विस्तृत हुई।

उनकी प्रकाशित एवं सूचीबद्ध कृतियों में **जड़ावरण, इन्द्रधनुष, गूँजे ध्वजा मम भारती, वंदना, राम जन्मभूमि गाथा (भाग 1, 2 और 3), ग़ज़ल-ए-रंजन, भक्ति सागर, अवहेलना, कुण्डली शतक, मेरी पूर्णागिरि यात्रा और मेरे संस्मरण** प्रमुख हैं।

### ‘शिवतांडवक’ — मौलिक भक्ति-रचना

‘शिवतांडवक’ भगवान शिव को समर्पित उनकी मौलिक भक्ति-रचना है, जो रावण द्वारा रचित पारंपरिक ‘शिव तांडव स्तोत्र’ से पूर्णतः भिन्न है। लेखक के संस्मरण के अनुसार इसकी रचना **1988 में 17 वर्ष की आयु में**, लखनऊ के क्रिश्चियन पीजी कॉलेज में B.Sc. के विद्यार्थी रहते हुए हुई थी। इसमें भक्ति-भाव, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली, काव्य-लय, शैव दर्शन और आध्यात्मिक बिंबों का समन्वय दिखाई देता है। यह रचना ज्योतिर्लिंग शिवमठ की भक्ति-परंपरा से भी जुड़ी हुई है।

## आध्यात्मिक जीवन और ज्योतिर्लिंग शिवमठ

वर्ष **1998 से** महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’ लखनऊ स्थित **ज्योतिर्लिंग शिवमठ** के महंत के रूप में सेवा कर रहे हैं। शिवमठ भगवान शिव, शिव-आराधना, रुद्राभिषेक, सनातन धर्म और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है।

शिवमठ की गतिविधियों में शिव-आराधना, रुद्राभिषेक, आध्यात्मिक साधना, धार्मिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता, गौ-सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा युवा पीढ़ी को नैतिक, अनुशासित और आध्यात्मिक रूप से सार्थक जीवन के लिए प्रेरित करना शामिल है। इसकी विशेषताओं में **निःशुल्क रुद्राभिषेक परंपरा** भी है, जिसमें रुद्राभिषेक के लिए कोई निश्चित शुल्क निर्धारित नहीं है।

उनके लिए आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत धार्मिक आचरण तक सीमित नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, दर्शन, शिक्षा, सेवा और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण से जुड़ा व्यापक जीवन-दृष्टिकोण है।

## साहित्य, आध्यात्मिकता और भारतीय चिंतन

‘रंजन’ जी के लेखन में मानवीय भावनाओं और भारतीय आध्यात्मिक चिंतन का निरंतर संवाद दिखाई देता है। उनकी रचनाओं में प्रेम, युवावस्था, प्रकृति, आत्मीयता, उत्कंठा, भक्ति, देशभक्ति, संवेदनशीलता, कल्पना और दार्शनिक चिंतन जैसे विषय आते हैं। उनका भक्ति-साहित्य भगवान शिव, सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक आयामों से जुड़ा है।

वे साहित्य को केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अनुभवों को संरक्षित करने, विचारों को संप्रेषित करने, सांस्कृतिक स्मृति को सुरक्षित रखने, आध्यात्मिक विचारों को व्यक्त करने और आत्मचिंतन को प्रेरित करने का माध्यम मानते हैं।

## आजीवन सीखने की यात्रा

ज्ञान की अनवरत खोज उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता है। प्रबंधन, कानून, मनोविज्ञान, संस्कृत, योग, ज्योतिष, हिंदी साहित्य, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विविध विषयों का अध्ययन उनके अंतर्विषयी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनके लिए शिक्षा केवल प्रमाण-पत्रों का संग्रह नहीं, बल्कि बौद्धिक अन्वेषण, आत्म-विकास और समझ की निरंतर प्रक्रिया है।

वे **हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला और संस्कृत** भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। संस्कृत के माध्यम से उनका संबंध भारतीय आध्यात्मिक एवं दार्शनिक साहित्य से गहरा होता है, जबकि अन्य भाषाएँ उनके साहित्यिक और समकालीन ज्ञान-विस्तार में सहायक हैं।

## परंपरा और आधुनिकता का संगम

पारंपरिक भारतीय आध्यात्मिक और साहित्यिक संस्कृति से जुड़े रहते हुए भी उन्होंने आधुनिक संचार और डिजिटल प्रकाशन को अपनाया है। **jyotirlingshivmath.in** के माध्यम से ज्योतिर्लिंग शिवमठ, साहित्यिक कृतियों, आध्यात्मिक रचनाओं, शिव-आराधना, रुद्राभिषेक तथा संबंधित सांस्कृतिक एवं भक्ति-सामग्री से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान और आध्यात्मिक साहित्य को सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए नई पीढ़ियों और व्यापक समाज तक पहुँचाया जा सकता है।

## एक सतत यात्रा

उनकी जीवन-यात्रा 1980 के दशक में किशोरावस्था में कविता-लेखन से आरंभ होकर **1986 में ‘जड़ावरण’, 1988 में ‘शिवतांडवक’, 1990 में ‘इन्द्रधनुष’, 1998 से ज्योतिर्लिंग शिवमठ के महंत के रूप में सेवा, विविध शैक्षणिक योग्यताओं की प्राप्ति और 2025 में ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ द्वारा मान्यता** तक विस्तृत है।

उनकी साहित्यिक और आध्यात्मिक यात्रा अभी भी निरंतर जारी है। उनकी पुस्तकें उनके जीवन के विभिन्न चरणों—युवावस्था की भावनात्मक अनुभूतियों, प्रकृति, भक्ति, सांस्कृतिक चेतना, स्मृतियों, यात्राओं और दार्शनिक चिंतन—को अभिव्यक्त करती हैं।

एक लेखक, कवि, योगाचार्य, आध्यात्मिक विद्वान, महंत और आजीवन अधिगमकर्ता के रूप में महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’ साहित्य, शिक्षा, आध्यात्मिकता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के बीच एक सेतु के रूप में अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उनके जीवन-दर्शन का मूल भाव है कि **ज्ञान की खोज की कोई आयु-सीमा नहीं होती, साहित्य जीवन के अनुभवों को संरक्षित कर सकता है और आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएँ निरंतर अध्ययन, आचरण और नई पीढ़ियों तक हस्तांतरण से जीवंत रहती हैं।**

Book Details

ISBN: 9789334517378
Publisher: RAJESH KUMAR TIWARI
Number of Pages: 106
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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