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तुम तक पहुँचने का रास्ता
इंतज़ार से इकरार तक की कहानी
कुछ प्रेम कहानियाँ सिर्फ मिलन तक सीमित नहीं होतीं…
वे इंतज़ार, त्याग, टूटन, जिम्मेदारियों और साहस से होकर गुजरती हैं।
यह कहानी है सोहम और मनोरमा की —
दो ऐसे लोगों की, जिन्होंने प्रेम को सिर्फ महसूस नहीं किया, बल्कि हर परिस्थिति में उसे निभाने की कोशिश की।
प्रयागराज की गलियों से शुरू हुआ यह रिश्ता धीरे-धीरे भावनाओं से निकलकर परिवार, समाज और भविष्य की वास्तविकताओं तक पहुँचता है।
जहाँ एक तरफ अधूरा अतीत है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा वर्तमान, जो हर मुश्किल में साथ खड़ा रहना चाहता है।
कई गलतफहमियों, डर, इंतज़ार और कठिन फैसलों के बीच यह कहानी हमें सिखाती है कि —
प्रेम सिर्फ “मैं तुम्हें चाहता हूँ” कह देने का नाम नहीं,
बल्कि हर हाल में साथ निभाने का साहस है।
यह उपन्यास उन लोगों के लिए है जिन्होंने कभी किसी का इंतज़ार किया है…
किसी को खोकर भी उसके लिए दुआ की है…
और प्रेम को सिर्फ भावना नहीं, एक जिम्मेदारी की तरह जिया है।
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“कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते…
वे बस दुआ बन जाते हैं।”
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