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अंतर्मन केवल एक कविता संग्रह नहीं, बल्कि भावनाओं, संघर्षों, स्मृतियों और आत्ममंथन की एक यात्रा है।
इस पुस्तक की कविताएँ उस व्यक्ति की आवाज़ हैं, जो बाहर से मुस्कुराता है, लेकिन भीतर अनेक प्रश्नों, सपनों, पीड़ाओं और संघर्षों से जूझ रहा होता है। इसमें जीवन के विभिन्न रंग—बचपन की यादें, गाँव का बदलता स्वरूप, पुरुष जीवन के संघर्ष, सफलता की प्रतीक्षा, एकांत, प्रेम, समाज की विसंगतियाँ और मन के अनकहे भाव—सरल एवं भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किए गए हैं।
'अंतर्मन' उन सभी संवेदनशील लोगों को समर्पित है, जो अपने दर्द को शब्दों में नहीं, बल्कि खामोशियों में जीते हैं।
यदि इन कविताओं में आपको अपने जीवन की कोई झलक दिखाई दे, तो यह पुस्तक अपने उद्देश्य में सफल होगी।
— शंकर खन्ना
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