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पादुकाओं का गणतंत्र

नंदीग्राम में सत्ता, मर्यादा और भरत
Shriniwasa Chari
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Religion & Spirituality
Language: English, Hindi
Price: ₹199 + shipping
This book ships within India only.
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Description

राम वनवास गए, पर अयोध्या का जीवन रुका नहीं। उनके जाने के बाद एक ऐसा समय आया, जब राज्य को राजा की उपस्थिति के बिना चलना था और मर्यादा को केवल स्मृति नहीं, व्यवहार में जीवित रखना था।

भरत के सामने सबसे कठिन प्रश्न था। वे सिंहासन स्वीकार किए बिना राज्य की व्यवस्था कैसे सँभालें? सत्ता उनके हाथ में थी, पर उन्होंने उसे अपना अधिकार नहीं माना। नंदीग्राम में राम की पादुकाओं को साक्षी बनाकर उन्होंने कर्तव्य, संयम और उत्तरदायित्व की एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत की।

"पादुकाओं का गणतंत्र" रामायण के इसी कम चर्चित, किन्तु गहरे अर्थपूर्ण काल की कथा है। यह भरत के आंतरिक द्वंद्व, अयोध्या की बदलती परिस्थितियों और उस नेतृत्व की पड़ताल करती है, जो पद पर बैठे बिना भी व्यवस्था को दिशा दे सकता है।

यह पुस्तक केवल रामायण के एक प्रसंग का पुनर्कथन नहीं, बल्कि सत्ता और सेवा, अधिकार और कर्तव्य, तथा व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी जीवित रहने वाले सिद्धांतों पर एक विचारपूर्ण साहित्यिक यात्रा है।

About the Author

Shriniwasa Chari एक लेखक, कॉरपोरेट लीडर और कथाकार हैं। भारतीय तथा बहुराष्ट्रीय संस्थानों में 35 से अधिक वर्षों के व्यावसायिक अनुभव के बाद, वे जीवन-मूल्यों, भारतीय परंपरा, नेतृत्व और मानवीय व्यवहार से जुड़े विचारों को कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।

उनकी लेखन-श्रृंखला "Gagar Me Sagar" में व्यावहारिक जीवन-अनुभव और चिंतनशील कथाएँ एक साथ आती हैं। उनका उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सीख को आज के जीवन और नेतृत्व से जोड़ना है।

Book Details

Publisher: Shriniwasa Chari
Number of Pages: 69
Dimensions: 5.51"x8.50"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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