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एक अधूरा संदेश। एक मरता हुआ राज़।
काठमांडू की एक सुबह, बौद्धनाथ स्तूप की भीड़ में, एक आदमी के हाथ में बचा है दुनिया के सबसे ख़तरनाक राज़ का आख़िरी टुकड़ा। उसके पीछे हैं शून्य के क़ातिल, और आगे हिमालय का वह रास्ता, जो बरसों से किसी ने नहीं चला।
अनाया, कबीर और नताशा को पोखरा की झील से लेकर मुस्तांग की बर्फ़ीली दीवारों तक भागना है, उस संदेश को खोलने के लिए जिसकी क़ीमत कई ज़िंदगियाँ हैं। हर मोड़ पर एक पुराना दोस्त, एक नया दुश्मन, और एक सच जो सब कुछ बदल देगा।
और इस सबके बीच, एक घड़ी चल रही है, जो किसी की याद है और किसी की आख़िरी उम्मीद।
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